Navratri 2026 Ghatasthapana: पहले दिन कैसे करें घटस्थापना? यहां जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और जरूरी सामग्री
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (TNT)।Navratri 2026 Ghatasthapana शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) के साथ इस पावन पर्व की शुरुआत होती है। विधि-विधान से कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मकता आती है।
सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ
इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। इसके लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही मां दुर्गा की पूजा और नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होगी।Navratri 2026 Ghatasthapana
कलश स्थापना के लिए जरूरी पूजन सामग्री की पूरी चेकलिस्ट
कलश स्थापना करने के लिए मिट्टी का चौड़े मुंह वाला पात्र, साफ मिट्टी, जौ, कलश, गंगाजल, शुद्ध पानी, सिक्का, सुपारी, साबुत चावल यानी अक्षत, दूर्वा, रोली, कलावा, आम या अशोक के पांच या सात पत्ते और पानी वाला नारियल रखें। इसके अलावा लाल कपड़ा या चुनरी, फूल, फल, पान, इलायची, लौंग, घी का दीपक, मिठाई और बताशे भी पूजा में काम आते हैं।Navratri 2026 Ghatasthapana
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण करें और माता रानी को फूल, चुनरी तथा श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।Navratri 2026 Ghatasthapana
अब मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी डालें और उसमें जौ बो दें। इसके ऊपर मिट्टी की एक हल्की परत डालकर थोड़ा पानी छिड़कें। इसके बाद पात्र को पूजा स्थल पर रखें। नवरात्रि के नौ दिनों तक जौ में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते रहें, ताकि उनमें अंकुर निकल सकें।Navratri 2026 Ghatasthapana
अब कलश पर कलावा बांधें। उसमें गंगाजल और साफ पानी भरें। अब उसमें साबुत सुपारी, सिक्का, अक्षत और हल्दी की गांठ जैसी शुभ वस्तुएं डाली जा सकती हैं। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। अब कलश को जौ वाले पात्र के पास रखें और मां दुर्गा के सामने घी का दीपक जलाएं। धूप, फूल, फल और मिठाई अर्पित करके मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और आरती करें।Navratri 2026 Ghatasthapana
धार्मिक मान्यताओं में जौ को समृद्धि और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में जौ बोना नई शुरुआत और खुशहाली से भी जुड़ा है। मान्यता है कि जौ का अच्छी तरह अंकुरित होना शुभ संकेत होता है।
–आईएएनएस


