Trump Iran Deal JCPOA: ओबामा से बेहतर है यह ऐतिहासिक डील

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ट्रंप का बड़ा दावा: 'ओबामा की JCPOA से बेहतर है हमारी ईरान डील', आखिर क्या थी वो डील?Trump Iran Deal JCPOA
Washington: This video screenshot shows U.S. President Donald Trump delivering a speech, at the White House in Washington, D.C., on Wednesday, April 1, 2026. (Xinhua via IANS)

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था

Trump Iran Deal JCPOA ट्रंप ने कहा ‘ईरान संग समझौता ओबामा के जेसीपीओए से बेहतर’, आखिर क्या थी वो डील?

नई दिल्ली, 14 जून (TNT)।Trump Iran Deal JCPOA अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जेसीपीओए समझौते से बेहतर डील करने का ऐलान किया। 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था, जिसे ज्वाइंट कंप्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए), यानी ‘संयुक्त व्यापक कार्ययोजना’ (आसान भाषा में ईरान परमाणु समझौता) कहा जाता है। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था।

यह समझौता ईरान और छह देशों यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच हुआ था।

Trump Iran Deal JCPOA ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर शनिवार को दावा किया कि उस समय हुआ समझौता काफी आसान सा था। उसके नियम सख्त नहीं थे। उनके अनुसार ओबामा प्रशासन द्वारा ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते अमेरिका के लिए नुकसानदायक और ‘खराब डील’ रहे। इस समझौते से ईरान को अरबों डॉलर (जिनमें 1.7 अरब नकद शामिल थे) की आर्थिक राहत मिली, जिसका इस्तेमाल उसने अपना परमाणु कार्यक्रम और आक्रामक नीतियां आगे बढ़ाने के लिए किया।

Trump Iran Deal JCPOA 2015 में हुए उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध स्वीकार किए थे। उसे अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को 300 किलोग्राम से कम तक सीमित करना था और यूरेनियम संवर्धन का स्तर 3.67 प्रतिशत तक रखना था। यह स्तर परमाणु हथियार बनाने के लिए आवश्यक लगभग 90 प्रतिशत संवर्धन से काफी कम है, लेकिन बिजली उत्पादन जैसे शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए पर्याप्त माना जाता है।

Trump Iran Deal JCPOA इसके अलावा, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन करने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की संख्या लगभग 20,000 से घटाकर 6,104 करने पर सहमति दी। समझौते के तहत ईरान के अराक हेवी वॉटर रिएक्टर को भी पुनः डिजाइन किया गया ताकि वहां से प्लूटोनियम उत्पादन न हो सके, जिसे परमाणु हथियारों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

Trump Iran Deal JCPOA जेसीपीओए की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) को ईरान के परमाणु ठिकानों की व्यापक और सख्त निगरानी का अधिकार दिया। इसे दुनिया की सबसे कठोर परमाणु निरीक्षण व्यवस्थाओं में से एक माना गया।

हालांकि, 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर निकाल लिया और ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। अब ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ प्रस्तावित नया समझौता जेसीपीओए से बेहतर होगा, हालांकि दोनों समझौतों में क्या अंतर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

ईरान ने कहा- ‘हड़बड़ी न बरतें’

जहां एक तरफ ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ इस समझौते को लेकर बेहद उत्साहित हैं और इसके जल्द हस्ताक्षर होने की बात कह रहे हैं, वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ईरान का कहना है कि बातचीत अंतिम चरण में जरूर है, लेकिन हस्ताक्षर होने में कुछ दिनों का समय लग सकता है क्योंकि अमेरिकी पक्ष के रुख में अक्सर अस्थिरता देखी जाती है।

बहरहाल, अगर यह समझौता अपनी तार्किक परिणति तक पहुंचता है, तो यह वैश्विक तेल बाजार, भारत सहित दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व में शांति के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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आईएएनएस

केआर/

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