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लुधियाना2 घंटे पहले

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  • हादसे के ढाई साल बाद भी मुआवजे का इंतजार, पीड़ित आर्थिक बदहाली की आग में झुलस रहे

(राजदीप सिंह सैनी)
ग्यासपुरा की सम्राट कॉलोनी में ढाई साल पहले हुए सिलेंडर ब्लास्ट में अभी तक पीड़ित परिवार रोजाना झुलस रहे हैं। हादसे में 15 लोगों की मौत और 36 लोग गंभीर जख्मी हुए थे। इसमें किसी को इकलौता बेटा, किसी का पति तो किसी ने पिता को खोया। किसी ने कर्ज लेकर इलाज कराया तो किसी ने अपनी जमा-पूंजी लगा दी। वहीं, अब पीड़ित दो वक्त की रोटी को मोहताज हो चुके हैं। पीड़ितों को तक मुआवजा नहीं मिला। नवंबर 2018 में नेताओं-प्रशासनिक अफसरों ने गैस सिलेंडर कंपनी की तरफ से इंश्योरेंस के चेक पीड़ितों को बांटे, तब उन्होंने सभी को सरकार की तरफ से 2-2 लाख देने का वादा तो कर दिया, जो अभी तक अधूरा है।

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पति के जाने के बाद अब व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए खाने-पीने का सामान करती रही तैयार
हादसे में पति को खोने वाली शांति देवी का दर्द करवाचौथ पर और भी गहरा हो गया। 22 साल तक पति की लंबी दुआ के लिए व्रत रख चुकी शांति ने इस बार व्रत तो नहीं रखा, लेकिन पति की याद में हर साल व्रत पर खाने-पीने का सामान जरूरत तैयार करती है। वहीं, अंजू की पवन से शादी तीन 3 पहले हुई थी। व्रत पर खुद का सुहाग तो नहीं रहा, लेकिन घर में बाकी महिलाओं को तैयार होते देख रोती रही। जबकि सास से पति के जाने का दर्द बयां करती रही।

इलाज का खर्च इतना कि चढ़ा कर्ज: सम्राट कॉलोनी के जोगिंदरपाल ने बताया कि पत्नी अगानियां देवी (65) 90% झुलसी और 66 दिन अस्पताल रही। कंपनी ने सिर्फ 47 हजार बिल दिया। पैसे न होने पर कर्ज लिया और साढ़े तीन महीने घर में इलाज चला। रोजाना 900 रुपए लगते थे। हादसे से उसकी एक आंख, दोनों कान खराब हो गए और दिमाग में भी असर हुआ।

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घर का गुजारा भी मुश्किल:
हादसे में 45% झुलसी अंजू देवी (30) के दोनों बाजू गर्दन और पीठ बुरी तरह झुलस गई। सर्जरी हुई, काफी पैसा लगाना पड़ा। अब हालात ऐसे हैं कि रोटी बनात दोनों बाजू जलती है। बाहर निकल नहीं पाती। सर्दी की रातों में जख्म दर्द होते हैं। पति अकेले कमाते हैं। उससे गुजारा नहीं हो पा रहा। मदद को कई सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाए, मगर किसी ने नहीं सुनी। आर्थिक तंगी के चलते दोनों बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई।

अब उधार लेकर खा रहे: फूलमंती ने बताया कि उनका जवान बेटा पवन कुमार बचाव करते समय झुलस कर मर गया। उसकी 3 साल पहले शादी हुई थी और दो बच्चे हैं। उसके सिर पर परिवार के 8 मेंबरों का खर्च चल रहा था। दो साल पहले पैसे मिले थे, लेकिन वह पवन के इलाज को लिया कर्ज लौटा दिया। पवन की मौत के बाद उसकी पत्नी अंजू बीमार हुई। लंबा समय अस्पताल रही और अभी तक वह दवाई के सिर पर चल रही है। अगर घर में कोई पैसा आए तो वह उसकी दवाइयों में लग जाता है।

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तीनों बच्चों की पढ़ाई छूटी: शांति देवी के पति राम नरेश (45) प्राइवेट फैक्ट्री में सुपरवाइजर थे। आग लगने की सूचना पर मौके पर गए तो धमाके में झुलसने से चल बसे। सरकार से मुआवजा मांगा तो नेताओं ने इंश्योरेंस के चेक दे दिए। जबकि खुद मुआवजा देने की बात कही। अब हालात ऐसे हैं कि दो बेटों और बेटी की पढ़ाई छुड़वानी पड़ी। 17 साल के बेटे को नौकरी पर लगाया। अब वह 5-6 हजार रुपए लाता है, उससे घर का गुजारा चल पाता है।

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