Pia Dandiya ने रिपब्लिकन पार्टी के कारोबारी उम्मीदवार केसी असकर को पराजित किया
वाशिंगटन, 4 नवंबर (TNT)।Pia Dandiya राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले अप्रवासी भारतीय माता-पिता की बेटी पिया दांडिया ने मंगलवार को हुए फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर ली है। डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।
Pia Dandiya दांडिया ने रिपब्लिकन पार्टी के कारोबारी उम्मीदवार केसी असकर को पराजित किया। डिसीजन डेस्क मुख्यालय और सीबीएस न्यूज के अनुमानों के मुताबिक, उन्होंने यह मुकाबला अपने नाम किया। एनबीसी न्यूज ने भी उन्हें इस सीट का संभावित विजेता घोषित किया। करीब 99 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने के बाद दांडिया लगभग 52 प्रतिशत वोट के साथ आगे थीं, जबकि असकर को करीब 48 प्रतिशत मत मिले। एनबीसी न्यूज के अनुसार, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में इस सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में करीब 14 प्रतिशत का रुझान बदला।
काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं दांडिया का बचपन जुपिटर में बीता
Pia Dandiya पाम बीच काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं दांडिया का बचपन जुपिटर में बीता। उनके माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका पहुंचे थे और यहीं बस गए। अमेरिका आने के बाद उनके पिता डॉ. रोहित दांडिया ने बतौर डॉक्टर सेवाएं जारी रखीं, जबकि उनकी मां ने 40 वर्ष की उम्र में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की। इस स्कूल की शुरुआत भी मुख्य रूप से पिया की शिक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी।
दांडिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े माहौल में हुआ
Pia Dandiya दांडिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े माहौल में हुआ। उनके माता-पिता बचपन में उन्हें भारत भेजते थे, ताकि वह अपने चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें और अपनी जड़ों को समझ सकें।
अगस्त 2025 में न्यू इंडिया अब्रॉड को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था, “मेरे माता-पिता बहुत छोटी उम्र से ही मुझे अकेले भारत भेजते थे, ताकि मैं अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता सकूं। ये यात्राएं मेरे जीवन को बदलने वाली साबित हुईं और मेरी पहचान को आकार देने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनसे मुझे समझने का मौका मिला कि अलग-अलग लोकतंत्र किस तरह काम करते हैं और दुनिया में असमानता किस तरह मौजूद है।”
गर्मी की छुट्टी दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने में बिताई
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गर्मी की छुट्टी दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने में बिताई। वह आशा कोऑपरेटिव सोसायटी के साथ जुड़ी थीं और सात से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों को पढ़ाती थीं।Pia Dandiya
इस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “वंचित बच्चों को पढ़ाते हुए मैंने सीखा कि लोगों के बीच वास्तव में अंतर उनकी क्षमताओं का नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का होता है जिनमें उन्हें जीवन बिताना पड़ता है।”
2025 में इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड की ओर से समर्थन मिलने पर दांडिया ने अपने राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, “मेरा जन्म और पालन-पोषण इसी क्षेत्र में हुआ। मेरे माता-पिता अमेरिकी सपने को पूरा करने की उम्मीद लेकर इस देश आए थे। मैंने अपना करियर यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित किया है कि यह सपना अधिक से अधिक परिवारों की पहुंच में हो।”Pia Dandiya
28 वर्ष की उम्र में वह न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं।
दांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से गवर्नमेंट विषय की पढ़ाई की और बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उन्होंने बोस्टन में ‘टीच फॉर अमेरिका’ कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया। इसके बाद महज 28 वर्ष की उम्र में वह न्यूयॉर्क के हार्लेम में डेमोक्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं।Pia Dandiya
उनके चुनाव अभियान के अनुसार, इस स्कूल के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे। इसके बावजूद स्कूल के सभी स्नातक विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश मिला।
उन्होंने न्यू इंडिया अब्रॉड से कहा था, “मेरे स्कूल के करीब 86 प्रतिशत विद्यार्थी गरीबी में जीवन बिता रहे थे। लेकिन हमने उन्हें बेहतर भविष्य का भरोसा दिया था। हमने वादा किया था कि यदि वे हमारे स्कूल में पढ़ेंगे तो उनमें से 100 प्रतिशत को कॉलेज में दाखिला मिलेगा।”
वर्ष 2020 में दांडिया को व्हाइट हाउस फेलो चुना गया था। इस दौरान उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। बाद में उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों का नेतृत्व किया। इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रित्जकर ने उन्हें राज्य की पी-20 परिषद में भी नियुक्त किया था।
फ्लोरिडा में मध्यावधि परिसीमन के बाद उन्होंने 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने का फैसला
चुनावी राजनीति में यह उनका पहला प्रयास था। शुरुआत में उन्होंने फ्लोरिडा के 21वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था, जहां उनका मुकाबला रिपब्लिकन सांसद ब्रायन मास्ट से होना था। हालांकि, फ्लोरिडा में मध्यावधि परिसीमन के बाद उन्होंने 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। 18 अगस्त को उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी का प्राइमरी चुनाव जीता।Pia Dandiya
फ्लोरिडा पॉलिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता पंजीकरण के लिहाज से यह क्षेत्र रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जाता है। यहां करीब 1.85 लाख रिपब्लिकन, 1.46 लाख डेमोक्रेटिक और 1.50 लाख अन्य राजनीतिक संबद्धता वाले मतदाता हैं।Pia Dandiya
अपने चुनाव प्रचार में दांडिया ने महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। फ्लोरिडा पॉलिटिक्स से बातचीत में उन्होंने कहा था, “दक्षिण फ्लोरिडा के लोग बढ़ती लागत और वाशिंगटन से निकलने वाली दिखावटी राजनीति से तंग आ चुके हैं।”Pia Dandiya
इस चुनाव में दोनों उम्मीदवारों के बीच भारी आर्थिक मुकाबला भी देखने को मिला। 14 अक्टूबर तक दांडिया के चुनाव अभियान को करीब 46 लाख डॉलर का चंदा मिला था, जबकि असकर ने लगभग 74 लाख डॉलर जुटाए थे। हालांकि, असकर की इस राशि का बड़ा हिस्सा उनके अपने चुनाव अभियान को दिए गए कर्ज से आया था। संघीय चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने करीब 68 लाख डॉलर स्वयं अपने अभियान में लगाए थे।Pia Dandiya
फेडरल इलेक्शन कमीशन के दस्तावेजों के मुताबिक, मैगा इंक से वित्त पोषित सुपर पीएसी ‘नो गोइंग बैक पीएसी’ ने 24 अक्टूबर तक दांडिया के खिलाफ करीब 65 लाख डॉलर खर्च किए थे। वहीं, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले प्रमुख सुपर पीएसी ‘हाउस मेजॉरिटी पीएसी’ ने असकर के खिलाफ करीब 79 लाख डॉलर खर्च किए।Pia Dandiya
दांडिया को इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट फंड और सर्व अमेरिका पीएसी के अलावा वेलिंगटन के रिपब्लिकन मेयर माइकल नेपोलियोन का भी समर्थन मिला था। नेपोलियोन ने कहा था, “मैं हमेशा मानता रहा हूं कि पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है और पिया ने मेरा सम्मान तथा समर्थन हासिल किया है।”
पूर्व अमेरिकी परिवहन मंत्री पीट बटिगिएग ने 26 अक्टूबर को उनके समर्थन में चुनाव प्रचार भी किया था।Pia Dandiya
डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने एक्स पर दांडिया की जीत और उनके चुनाव प्रचार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिण फ्लोरिडा के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत का संकट दूर करना तथा हर व्यक्ति को अमेरिकी सपना पूरा करने का अवसर देना शामिल था।
भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी उनकी जीत पर बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस का चुनाव जीतने के लिए पिया दांडिया को बधाई! मैं सदन में तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला का स्वागत करने को लेकर बेहद उत्साहित हूं।”
दांडिया पाम बीच गार्डन्स में अपने पति नवनीत अलग और बेटे साहिब के साथ रहती हैं।
उनकी जीत के साथ अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनौपचारिक समूह ‘समोसा कॉकस’ की मौजूदगी भी बरकरार रहेगी।
–आईएएनएस


