नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकासशील देशों के लिए एक ‘लाइफलाइन’ बनकर उभर रहा है। वर्ल्ड बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से कम और मध्यम आय वाले देश वह प्रगति महज 10 वर्षों में हासिल कर सकते हैं, जिसे हासिल करने में पहले एक सदी (100 साल) का समय लगता। हालांकि, इसके लिए सरकारों को बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल कौशल और संस्थागत गुणवत्ता की कमियों को तेजी से दूर करना होगा।
- नौकरियों पर खतरा कम: अमीर (उच्च आय वाले) देशों की तुलना में विकासशील देशों में AI ऑटोमेशन से नौकरियां जाने का खतरा तीन गुना कम है। high-income वाले देशों में 14.2% नौकरियां खतरे में हैं, जबकि विकासशील देशों में यह आंकड़ा केवल 4.5% है।
- उत्पादकता (Productivity) में उछाल: विकासशील देशों की 16.2% नौकरियों में AI से कार्यक्षमता बढ़ेगी, जो अमीर देशों (18.7%) के लगभग बराबर है।
- सस्ते और छोटे AI टूल्स की जरूरत: वर्ल्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रमित गिल के अनुसार, विकासशील देशों को बड़े डेटा सेंटर या महंगे मॉडल्स की जरूरत नहीं है। स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ढाले गए छोटे और सस्ते AI टूल्स से ही स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय और कृषि सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
- सरकार और व्यवसायों के लिए मौका
- वर्ल्ड बैंक ने स्पष्ट किया है कि AI का सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों को हटाने में नहीं, बल्कि उनकी क्षमता और काम करने की रफ्तार को बढ़ाने में है। टैक्स कलेक्शन, सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य देखभाल और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में AI का सही इस्तेमाल करके विकासशील देश अपनी आर्थिक सुस्ती को दूर कर सकते हैं।


