तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की खोज के लिए दो वैज्ञनिकों को मिला चिकित्सा शेत्र में 2021- का नोबेल पुरस्कार डा: सुनीता जैन

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तापमान और स्पर्श के लिए रिसेप्टर्स की खोज के लिए दो वैज्ञनिकों को मिला चिकित्सा शेत्र में 2021- का नोबेल पुरस्कार डा: सुनीता जैन

एच. ऐ. यू. के पूर्व प्रोफेसर डा: सुनीता जैन ने कहा कि तापमान एवम स्पर्श के रहस्यों के खोज के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस और अर्देम पटापाउटियन को चिकित्सा विज्ञान में सन् 2021 का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया।
सीनियर सिटीजन क्लब में आयोजित वानप्रस्थ संस्था के विषय- विशेष श्रृंखला में डा: सुनीता जैन ने बताया कि मनुष्य के लिए
स्पर्श एवम तापमान की अनुभूति होना अति आवश्यक है। हमारी पांच
इंद्रियाँ हर तरह से जीवन के लिए आवश्यक हैं। देखना, सुनना, सूंघना, स्पर्श एवम स्वाद का आभास होना ही मनुष्य के जीवित रहने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने इस पुरस्कार के विषय पर सम्बोधित करते हुए कहा कि डेविड जूलियस ने मिर्च में पाए जाने वाले सक्रिय घटक कैप्साइसिन का उपयोग कर त्वचा की कोशिकाओं के अंत में पाए जाने वाले रिसेप्टर्स ( ग्राही-कोशिकाएं )
( TRPV-1) की खोज की। मैनथोल् जोकि पुदीना में पाया जाता है, उसमें ठंड महसूस करने वाले सेंसर ( TRPM-8) की पहचान की ।
वहीं अर्देम पटापाउटियन ने स्वतन्त्र रूप से स्पर्श यानि दबाव के प्रति पाए जाने वाले रिसेप्टर्स की खोज की। स्पर्श अथवा दबाव के सेंसर ( Piezo -1 और Piezo -2) त्वचा के आंतरिक अंगों में पाए जाते हैं । यह सांस प्रक्रिया, रक्तचाप एवम पसीने आदि महत्वपूर्ण क्रियाओं में योगदान करते हैं।
डा: जैन ने बताया कि इन खोजों के फल स्वरूप हमें गर्मी, सर्दी, स्पर्श अथवा दबाव आदि की अनुभूति और हमारे तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System) में होने वाले बदलाव की समझ में वृद्धि हुई है। इन खोजों के परिणाम स्वरूप हमे पुराने दर्दों की दवाईयां विकसित करने में सहायता मिलेगी।
पुरस्कार की घोषणा के बाद नोबेल समिति के महासचिव थॉमस पर्लमन ने कहा, ‘ इन खोजों से असल में प्रकृति का एक बड़ा रहस्य उजागर हुआ है। यह खोज हमारे अस्तित्व के लिए बेहद अहम है ।’
चर्चा में भाग लेते हुए डा: सुनीता श्योकंद के प्रश्न के उत्तर में डा: जैन बताया कि तापमान की पर्तिक्रिया रिसेप्टर्स ( ग्राही- कोशिकाएं ) पर क्षणिक व् अस्थाई होती है।
श्री अजीत सिंह के एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि गर्म क्षेत्रों में रहने वाले लोग अधिक मिर्च खाते हैं, इस से अधिक पसीना आता है तथा शरीर को ठंडक मिलती है।
इनके अतिरिक्त चर्चा में डा: स्वराज, डा: जे. के. डांग , डा: सुरजीत डुडेजा एवम डा: ए. एल. खुराना ने भाग लिया।
संस्था के जनरल सेक्रेटरी डा: जे. के. डांग ने बताया कि विषय- विशेष शृंखला में श्री मती सुनीता महतानी साहित्य के नोबेल – पुरस्कार -2021 पर
बुधवार ( 22.12.2021) को अपना व्याख्यान देंगी।

 

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