अब एचएयू डिस्टिलरी की फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश से बनाएगा फास्फॉटिक फर्टिलाइजर यूएसए स्थित इंटरनेशल फर्टिलाइजर डेवलपमेंट सेंटर के साथ किया एमओयू साइन वेस्ट टू वेल्थ मेें बदलने की तकनीक को करेंगे सार्थक

Read Time:5 Minute, 15 Second

8X1A2991चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार जल्द ही डिस्टिलरी से निकलने वाली फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश से फास्फॉटिक फर्टिलाइजर तैयार करने पर काम  करेगा  । इसके लिए विश्वविद्यालय ने यूएसए स्थित विश्व के एकमात्र उर्वरक शोध संस्थान इंटरनेशल फर्टिलाइजर डेवलपमेंट सेंटर (आईएफडीसी) के साथ एमओयू साइन किया है। इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए शुगरफेड हरियाणा प्रथम वर्ष एचएयू, आईएफडीसी व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को साढ़े सात करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।
फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश का निस्तारण है बड़ी समस्या : प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने बताया कि डिस्टिलरी से निकलने वाली फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश का निस्तारण मौजूदा समय में एक  बड़ी समस्या है, इनका फास्फॉटिक फर्टिलाइजर बनाना वेस्ट टू वेल्थ की सोच को सार्थक करने की दिशा में एक अहम कदम है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान के साथ एमओयू के तहत विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और किसानों के लिए अनुसंधान, शिक्षा व प्रशिक्षण जैसे विभिन्न सहयोगात्मक कार्यक्रमों का संयोजन व आदान-प्रदान करेगा। संस्थान के विशेषज्ञ व एचएयू के वैज्ञानिक व विद्यार्थी मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे और आईएफडीसी की ओर से तकनीक सीखने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
भारत सालाना 7000 करोड़ रुपये की उर्वरक का कर सकता है उत्पादन
यूएसए स्थित इंटरनेशल फर्टिलाइजर डेवलपमेंट सेंटर के कंट्री हेड डॉ. यशपाल सहरावत के अनुसार वर्तमान समय में पोटेशियम फर्टिलाइजर का एक 50 किलोग्राम का बैग जिसकी कीमत करीब 750 रूपये तक आंकी गई है जबकि उसी बैग का विकल्प फास्फॉटिक फर्टिलाइजर मात्र 180 रूपये में उपलब्ध हो सकेगा। राज्य में सालाना लगभग 14000 टन पोटाश और 7000 टन फास्फोरस यानी लगभग 15 प्रतिशत पोटाश उर्वरक और 2 प्रतिशत फास्फोरस उर्वरक का उत्पादन राज्य कर सकता है। मौद्रिक दृष्टि से राज्य सालाना लगभग 55 करोड़ रुपये और 27 करोड़ रुपये मूल्य के पोटाश और फास्फोरस उर्वरक का उत्पादन करेगा जिससे केंद्र सरकार के सब्सिडी बोझ को सालाना 30 करोड़ रुपये से अधिक कम कर सकता है। इस नवीन तकनीक से भारत सालाना 7000 करोड़ रुपये की उर्वरक का उत्पादन कर सकता है।
पिछले छह दशकों में अकार्बनिक उपयोग में हुई है 68 प्रतिशत बढ़ोतरी
एक अनुमान के मुताबिक हरियाणा राज्य ने पिछले छह दशकों में अपने अकार्बनिक उर्वरक उपयोग में 68 गुना वृद्धि की है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि केवल 12 गुना है। मृदा स्वास्थ्य को लेकर तैयार रिपोर्ट कार्ड पोर्टल के अनुसार राज्य में 90 प्रतिशत से अधिक मिट्टी में नाइट्रोजन, 56 प्रतिशत फॉस्फोरस और 50 प्रतिशत से अधिक पोटाश की कमी है। 2012 से राज्य में पोटेशियम की कमी 2.5 प्रतिशत बढ़ गई है।
ये भी रहे मौजूद
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज की उपस्थिति में विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के. सहरावत, मानव संसाधन निदेशालय के निदेशक डॉ. एम.एस. सिद्धपुरिया जबकि  आईएफडीसी   की ओर से कंट्री निदेशक डॉ. यशपाल सहरावत व कंसल्टेंट डॉ. सांई दास ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ओएसडी एवं स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. अतुल ढींगड़ा, मीडिया सलाहाकार डॉ. संदीप आर्य, सहायक निदेशक, आईपीआर सेल डॉ. विनोद कुमार व डॉ. जयंती टोकस भी मौजूद रहे।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Campus School scaled Previous post एचएयू के कैंपस स्कूल में जरूरतमंद बच्चों को वितरित की जर्सियां व टिफिन
Next post कैंपस स्कूल के तनिष्क ने डिस्कस थ्रो में जिला स्तर पर हासिल किया प्रथम स्थान
Social Share Buttons and Icons powered by Ultimatelysocial
%d bloggers like this: