50 हजार साल पुरानी लोनार झील: क्यों बदलता है इसका पानी का रंग?”Lonar Lake mystery

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50 हजार साल पुरानी लोनार झील: क्यों बदलता है इसका पानी का रंग?"Lonar Lake mystery

शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर समझा गया था लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह उल्कापिंड की टक्कर से बना है

महाराष्ट्र का 50 हजार साल पुराना लोनार झील, जहां रहस्यमयी ढंग से बदलता है पानी का रंग Lonar Lake mysteryनई दिल्ली, 9 अप्रैल (TNT)। प्रकृति जितनी खूबसूरत है उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। महाराष्ट्र में स्थित लोनार क्रेटर देश की धरती पर एक अनोखा प्राकृतिक चमत्कार है। यह क्रेटर लगभग 35 हजार से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर समझा गया था लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह उल्कापिंड की टक्कर से बना है।

दुनिया में बेसाल्ट चट्टानों पर बना एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर

Lonar Lake mystery यह दुनिया में बेसाल्ट चट्टानों पर बना एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर है, जो चंद्रमा और मंगल ग्रह के क्रेटरों का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण है। लोनार क्रेटर महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में लोनार गांव के पास स्थित है। यह दक्कन पठार के अंदर है, जहां 65 मिलियन साल पहले हुए विशाल ज्वालामुखीय विस्फोटों से बनी बेसाल्ट चट्टानें फैली हुई हैं। 1823 में ब्रिटिश अधिकारी सी.जे.ई. अलेक्जेंडर ने इसे पहचाना था।

लोनार क्रेटर न सिर्फ भूविज्ञान का रहस्य है बल्कि पर्यटन स्थल भी

Lonar Lake mystery इसके बाद लंबे समय तक भ्रम बना रहा कि यह ज्वालामुखी क्रेटर है। 1970 के दशक में ‘मास्केलिनाइट’ नामक प्राकृतिक कांच की मौजूदगी ने साबित कर दिया कि यह उल्कापिंड की तेज टक्कर से बना है। लोनार क्रेटर न सिर्फ भूविज्ञान का रहस्य है बल्कि पर्यटन स्थल भी है। यहां घूमने वाले पर्यटक इस अनोखी झील और क्रेटर की सुंदरता का आनंद लेते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि लोनार ब्रह्मांड की टक्करों और पृथ्वी के इतिहास को समझने में मदद कर सकता है, जिसे लेकर तमाम स्पेस एजेंसी काम भी कर रही हैं।

मास्केलिनाइट केवल तेज गति की टक्करों में ही बनता है

Lonar Lake mystery मास्केलिनाइट केवल तेज गति की टक्करों में ही बनता है। क्रेटर का व्यास औसतन लगभग 1,830 मीटर यानी लगभग 1.8 किलोमीटर है और यह करीब 150 मीटर गहरा है। इसका किनारा आसपास की जमीन से लगभग 20 मीटर ऊंचा उठा हुआ है। क्रेटर के अंदर एक झील बनी हुई है, जो नमकीन और क्षारीय है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के उपग्रह ने साल 2004 में इसकी तस्वीर ली थी, जिसमें झील हरी-नीली दिखाई देती है और चारों ओर वनस्पति, खेत और बस्तियां साफ नजर आती हैं।

लोनार क्रेटर का सबसे रोचक रहस्य इसकी झील का रंग बदलना है

Lonar Lake mystery लोनार क्रेटर का सबसे रोचक रहस्य इसकी झील का रंग बदलना है। जून 2020 में झील का रंग अचानक हरे से गुलाबी या लाल हो गया। वैज्ञानिकों ने सैंपल लिए और पाया कि यह हेलोआर्किया जैसे नमकीन पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों के कारण हुआ। गर्म और सूखे मौसम में पानी का स्तर कम होने से खारापन बढ़ गया, जिससे ये जीव बढ़ जाते हैं और गुलाबी रंग पैदा करने लगते हैं। ऑस्ट्रेलिया की लेक हिलियर या ईरान की लेक उर्मिया में भी ऐसा होता है।

यह क्रेटर वैज्ञानिकों के लिए खास है क्योंकि यह बेसाल्ट चट्टानों पर बना

Lonar Lake mystery हालांकि, लोनार झील का रंग हमेशा नहीं रहता बल्कि यह मौसम के अनुसार बदलता रहता है। यह क्रेटर वैज्ञानिकों के लिए खास है क्योंकि यह बेसाल्ट चट्टानों पर बना है, जो चंद्रमा की सतह से मिलता-जुलता है। नासा के साथ ही भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों ने यहां काफी अध्ययन किया है। हाल के वर्षों में झील का पानी बढ़ने की समस्या भी सामने आई है, जिससे पास में स्थित प्राचीन मंदिर प्रभावित हुए हैं और झील का रासायनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। —आईएएनएस एमटी/पीएम

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