1रणनीतिक दबाव: डील को लेकर अमेरिका पर भारत–यूरोपीय संघ एफटीए का असर भी हो सकता है India EU FTA Pressure—दक्षिण एशियाई विशेषज्ञ

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1रणनीतिक दबाव: डील को लेकर अमेरिका पर भारत–यूरोपीय संघ एफटीए का असर भी हो सकता है India EU FTA Pressure—दक्षिण एशियाई विशेषज्ञ

यूरोपीय संघ के साथ हुई डील ने अमेरिका के लिए इस प्रक्रिया को तेज करने की भूमिका निभाई है।

अमेरिका पर डील को लेकर भारत-ईयू एफटीए का दबाव भी हो सकता है : दक्षिण एशियाई विशेषज्ञ India EU FTA Pressure नई दिल्ली, 3 फरवरी (TNT)। एशिया सोसाइटी की दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के अनुसार, पिछले महीने यूरोपीय संघ के साथ भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) ने अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौता करने का दबाव बढ़ाने वाला एक कारक हो सकता है

India EU FTA Pressure। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया इनिशिएटिव्स की डायरेक्टर फरवा आमेर ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताए भले ही पहले से चल रही थीं, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ हुई डील ने अमेरिका के लिए इस प्रक्रिया को तेज करने की भूमिका निभाई है।

शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा

उन्होंने कहा कि India EU FTA Pressure समझौते का समय भी दिलचस्प है, क्योंकि यह ठीक यूरोपीय संघ के एफटीए के तुरंत बाद सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता हो गया है। इसके तहत अमेरिका भारत से होने वाले निर्यात पर शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।

व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क भी हटा लेगा, जो रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया था।

भारत के लिए, रूस का सवाल बना हुआ है

करीब एक साल तक चली बातचीत के बाद यह सफलता मिली। इस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत कई बार मुश्किल दौर से भी गुजरी। इस India EU FTA Pressure समझौते की घोषणा पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत के बाद की गई। फरवा आमेर ने कहा कि भारत के लिए रूस से जुड़े सवाल अभी भी अहम हैं।

भले ही भारत अपने तेल आयात में बदलाव कर रहा हो, लेकिन वह रूस के साथ अपने रिश्ते संतुलित रखना चाहता है। आमेर ने कहा, “भारत के लिए, रूस का सवाल बना हुआ है।

भले ही उसने रूस से अपने तेल आयात ढांचे को बदल दिया है और बदलेगा, भारत फिर भी संबंधों को स्थिर रखना चाहेगा। जहां तक भारत-अमेरिकी ट्रेड डील की बात है तो शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर हुई बातचीत ने इस समझौते को संभव बनाया।”

एक अन्य ट्रेड विशेषज्ञ वेंडी कटलर का कहना है कि इस समझौते से भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की तुलना में फायदा मिलेगा। अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जबकि आसियान देशों पर यह शुल्क 19 से 20 प्रतिशत के बीच रहेगा।India EU FTA Pressure

राष्ट्रपति ट्रंप की भाषा साफ नहीं है

इससे भारतीय निर्यातकों को थोड़ी बढ़त मिलेगी। एएसपीआई की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और पूर्व कार्यवाहक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, कटलर ने कहा कि यह संभावना है कि अमेरिका को ईयू की तुलना में बेहतर डील मिली है। उन्होंने बताया कि भारत ने शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने की बात कही है, लेकिन इस पर राष्ट्रपति ट्रंप की भाषा साफ नहीं है। India EU FTA Pressure

हालांकि ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि भारत अमेरिका के खिलाफ शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य तक लाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। कुल मिलाकर, कटलर ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौता “अमेरिका और भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों, टेक्नोलॉजी सहयोग और सप्लाई चेन लचीलेपन से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर मिलकर काम करने का रास्ता साफ करेगा।India EU FTA Pressure

” इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका के दौरे पर रवाना हुए हैं, जहां वह महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे।India EU FTA Pressure —आईएएनएस एएस/

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