
इस एमओयू से होर्मुज खुलने की राह आसान हो गई है।
US Iran Peace Deal ईरानी मीडिया का दावा डील तैयार: अमेरिका ईरानी क्षेत्र से हटाएगा सेना? खुलेगा होर्मुज!
तेहरान, 27 मई (TNT)। ईरान के विभिन्न मीडिया आउटलेट्स ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका के साथ संभावित समझौते का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार दोनों देशों के बीच अनौपचारिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का शुरुआती प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस एमओयू से होर्मुज खुलने की राह आसान हो गई है।
अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी ईरानी इलाकों के इर्द गिर्द से कम करेगा और नौसैनिक घेराबंदी हटाएगा
US Iran Peace Dealड्राफ्ट के अनुसार ईरान एक महीने के भीतर होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग को संघर्ष से पहले के स्तर पर बहाल करेगा। इसके बदले अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी ईरानी इलाकों के इर्द गिर्द से कम करेगा और नौसैनिक घेराबंदी हटाएगा। दावा ये भी है कि तेहरान को अमेरिका के साथ संघर्ष समाप्त करने को लेकर एक अनौपचारिक मसौदे की एक प्रति मिल गई है।
इस प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका अपने सैन्य बलों को ईरान के आसपास के क्षेत्रों से हटाने पर सहमत हो सकता है। बदले में ईरान यह अनुमति देगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही 30 दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आएगी।US Iran Peace Deal
ईरान की मिजान समाचार एजेंसी ने भी प्रस्तावित ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के और विवरण जारी किए हैं, जिसमें बहु-स्तरीय शांति प्रक्रिया की बात पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान के आसपास के क्षेत्र से अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने या हटाने पर सहमति जताई है। हालांकि इसमें शामिल बलों और क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों से जुड़ी शर्तों पर आगे बातचीत की जरूरत पर बल दिया है।US Iran Peace Deal
अल जजीरा ने स्टेट मीडिया के हवाले से बताया कि इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।US Iran Peace Deal
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हाईली एनरिच्ड यूरेनियम, प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज ईरानी संपत्तियों जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में शामिल है। हालिया संघर्ष के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही और तेल सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई थी।
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