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हल्द्वानी रेलवे की जमीन पर सुनवाई आज जानें पूरा मामला

रेलवे के मुताबिक 2013 में गौला नदी में अवैध रेत खनन को लेकर मामला कोर्ट में पहुंचा था।

TNT News: हल्द्वानी में रेलवे की 78 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के सुप्रीम कोर्ट, उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को 9 जनवरी तक सामान हटाने का निर्देश दिया था। रेलवे की जमीन पर 4 हजार से अधिक मकान बने हुए हैं। उक्त भूमि पर ये परिवार काफी सालों से रहते हैं उक्त जमीन पर 4 से 5 बस्तिया बनी हुई है। इसके साथ-साथ जमीन पर जमीन पर धार्मिक स्थल, स्कूल, व्यापारिक प्रतिष्ठान और आवास हैं। यहां के निवासियों ने अपनी याचिका में कहा कि है कि हाईकोर्ट ने इस तथ्य से अवगत होने के बावजूद कि याचिकाकर्ताओं सहित निवासियों के टाइटल के संबंध में कार्यवाही जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है, विवादित आदेश पारित करने में गंभीर गलती की है। रेलवे के मुताबिक 2013 में गौला नदी में अवैध रेत खनन को लेकर मामला कोर्ट में पहुंचा था। रेलवे ने तर्क दिया था कि रेलवे के किनारे रहने वाले लोग ही अवैध खनन में शामिल हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने रेलवे को पार्टी बनाकर इलाका खाली कराने को कहा था। तब से यह विवाद चला आ रहा है।

हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को 9 जनवरी तक सामान हटाने का निर्देश दिया था। रेलवे की जमीन पर 4 हजार से अधिक मकान बने हुए हैं। उक्त भूिम पर ये परिवार काफी सालों से रहते हैं उक्त जमीन पर 4 से 5 बस्तिया बनी हुई है

वैलिड डॉक्यूमेंट्स होने का दावा

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनके पास वैलिड डॉक्यूमेंट्स हैं, जो स्पष्ट रूप से उनके टाइटल(जमीन) और वैध व्यवसाय को स्थापित करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट को राज्य के खिलाफ वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगाने के बजाय इन सभी दस्तावेजों पर उचित विचार करना चाहिए था। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निवासियों के नाम हाउस टैक्स रजिस्टर में नगरपालिका के रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं। और वे नियमित रूप से हाउस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।”

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर कब्जा किए गए निर्माण को गिराने का आदेश दिया

 हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के दिये थे आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर कब्जा किए गए निर्माण को गिराने का आदेश दिया था व हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि अतिक्रमणकारियों को एक सप्ताह का नोटिस दिया जाए, जिसके बाद अतिक्रमण तोड़ा जाए। इससे पहले रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 9 नवंबर 2016 को 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।

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