Ajab-gajab: भूलकर भी ना करें इस मंदिर में प्रवेश, यहाँ महिलाएं हो जाती है विधवा

Ajab-gajab: कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हो या फिर भगवान कृष्ण के अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान, यह रहेगी तो भारत की सबसे पावन-पवित्र भूमि. हमारी आस्थाओं के साथ साथ कुरुक्षेत्र की भूमि इतहास समेटे हुए है.

यहाँ का अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. इस पावन भूमि पर कई धार्मिक स्थल हैं, जिनसे श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है.

यही एक ऐसा भी मंदिर है, जिसे महिलाओं के लिए श्रापित माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से महिलाएं विधवा हो जाती हैं.

यह मंदिर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र से 20 किलोमीटर दूर पिहोवा में स्थित है. यहां सरस्वती तीर्थ पर भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय का मंदिर हैं. इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान कार्तिकेय की पिंडी है.

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मान्यता है कि महिलाओं को इस पिंडी के दर्शन नहीं करनी चाहिए. यदि महिलाएं इस मंदिर में दर्शन करती हैं तो वो सात जन्मों तक विधवा रहती है. इस मान्यता का जिक्र करते हुए मंदिर के बाहर बकायदा एक बोर्ड भी लगाया गया है.

सरसों का तेल अर्पित करने की है परम्परा (Ajab-gajab)

भगवान शंकर ने उन्हें पिहोवा तीर्थ पर जाने के लिए कहा था. यह भी मान्यता है कि कार्तिकेय के गर्म शरीर को शीतलता देने के लिए ऋषि-मुनियों ने सरसों का तेल उन पर चढ़ाया था.

शीतल होने पर कार्तिकेय पिहोवा तीर्थ पर ही पिंडी के रूप में विराजित हो गए थे. कार्तिकेय महाराज यहां पिंडी रूप में विराजित हैं. उनकी पिंडी पर सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा है. मान्यता है कि कार्तिकेय ने मां पार्वती से क्रोधित होकर अपने अपने शरीर का मांस और रक्त अग्नि को समर्पित कर दिया था.

नवजात बच्चियों नहीं कर सकती प्रवेश (Ajab-gajab)

महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने पर स्थानीय मंहत भी उन्हें विधवा होने की मान्यता के बारे में जानकारी देते हैं. यह नियम केवल महिलाओं पर लागू नहीं है, बल्कि छोटी और नवजात बच्चियों को भी गर्भगृह में प्रवेश नहीं करने का नियम है.

महिलाओं को हिदायत दी जाती है कि वह गर्भगृह के बाहर से ही कार्तिकेय महाराज का आशीर्वाद लें.

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