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हिसार2 घंटे पहले
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सॉन्ग की प्रस्तुति देती एच यू एसोसिएट प्रोफेसर संध्या शर्मा
- एचएयू की एसोसिएट प्रोफेसर और कल्चरल कोआर्डिनेटर संध्या का नया तरीका
(अंशुल पांडेय) अक्सर स्कूली बच्चे साइंस जैसे सब्जेक्ट्स से दूर भागते नजर आते हैं। इसके पीछे बच्चों का तर्क होता है कि उन्हें विज्ञान के अंदर छिपे रहस्य समझ नहीं आ रहे। ऐसे में शहर के एचएयू की एसोसिएट प्रोफेसर और कल्चरल कोआर्डिनेटर संध्या शर्मा ने बच्चों को साइंस समझाने का एक नया रास्ता निकाला है, जिससे बच्चे आसानी से मस्ती में गाते-गुनगुनाते साइंस सब्जेक्ट को समझ पा रहे हैं। खास यह है कि संध्या के इस प्रयास में एनसीआरटी भी जुड़ चुकी है।
दरअसल संध्या शर्मा ने नेशनल कांउसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीअारटी) के नौवीं कक्षा के एक चैप्टर को स्वांग शैली में बदला जिसके बाद अब बच्चे इस चैप्टर को आसानी से समझ भी पा रहे हैं और इसे पढ़ने में इंट्रेस्ट भी दिखा रहे हैं। हुआ यूं कि संध्या शर्मा को एनसीआरटी कैमिस्ट्री की रिसर्च सेक्रेटरी रूचि वर्मा ने विक्रमादित्य की कहानी को स्वांग शैली में प्रस्तुत करते हुए देखा जिससे बाद उन्हें विचार आया कि अगर साइंस से जुड़े चैप्टर्स को लोककलाओं के माध्यम से पढ़या जाए तो बच्चे आसानी से इन्हें समझ पाएंगे।
इसके बाद उन्होंने संध्या शर्मा को साइंस के एक चैप्टर को स्वांग शैली मे तैयार करने को कहा। इसे स्वांग संग विज्ञान का नाम दिया गया। संध्या ने नौवीं कक्षा के जीव जनन के पाठ को स्वांग शैली में तैयार किया, जो एनसीआरटी को पसंद आए। इसी वजह से अब संध्या शर्मा केा अन्य कई चैप्टर्स को इस शैली में तैयार करने का प्रोजेक्ट दिया गया है।
बच्चों को समझने में हो आसानी इसलिए ठेठ नहीं बोलचाल के हरियाणवी अंदाज में तैयार किया स्वांग
एनसीआरटी की ओर से तैयार किए गए इन वीडियोज का फायदा पूरे देश के स्टूडेंट उठा पाएं इसके लिए संध्या ने ठेठ हरियाणवी के बजाए केवल अंदाज को ही इस्तेमाल किया। उन्होंने हिंदी को हरियाणवी अंदाज में स्वांग शैली में प्रस्तुत किया जिससे देश भर के स्टूडेंट्स इसे समझ पाएं और खुद को इसके साथ जोड़ पाए। संध्या ने स्वांग की प्रस्तुति में हरियाणवी एसेंट ही रखा मगर इसका नरेशन हिंदी में रखा। जिससे बच्चे इसे आसानी से समझ पाएं। इस स्वांग प्रस्तुति में संध्या शर्मा के साथ हरमोनियम में रविन्द्र नागर और नगाडे में सुभाष नगाड़ा ने साथ दिया।
स्वांग में लोकगीतों, संगीत और नृत्य से प्रस्तुत की जाती लोककथाएं
स्वांग एक ऐसी हरियाणवी विधा है जिसमें लोककथाओं को लोकगीत,संगीत और नृत्य आदि से नाट्यबद्ध किया जाता है। इस शैली का इस्तेमाल अब तक लाेककथाओं को आम जन तक पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। हरियाणवी स्वांग परंपरा बहुत पुरानी है। स्वांग में हरियाणवी संस्कृति के दर्शन होते हैं और हरियाणवी जन-जीवन की झलक मिलती है।
2 महीने में तैयार किया स्वांग, समझाया जीव जनन का चैप्टर
संध्या शर्मा ने बताया कि इस स्वांग को उन्होंने 2 महीने की मेहनत से तैयार किया। एक घंटे के इस स्वांग में साइंस के जीव जनन के पाठ के जरिए बच्चों को भ्रूण हत्या के प्रति अवेयर करने का भी काम किया। संध्या के अनुसार अगर बच्चों को बचपन से ही अवेयर किया जाए तो भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को दूर किया जा सकता है।
संध्या शर्मा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को स्टूडेंट्स के साथ टीचर्स ने भी पसंद किया जिसके बाद अब 16 से 21 नवंबर तक के लिए एनसीआरटी एक वर्कशॉप ऑर्गेनाइज करवाने जा रहे जिसमें एन्वायरमेंटल सेफ्टी और पॉल्यूशन फ्री एन्वायरनमेंट सब्जेक्ट पर संध्या स्वांग की प्रस्तुति देगी।
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