नेपाल के प्रधानमंत्री की कूटनीति और नीतियों पर छिड़ी बहस, जानें पूरा मामला Nepal PM Policy

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नेपाल के प्रधानमंत्री की कूटनीति और नीतियों पर छिड़ी बहस, जानें पूरा मामला Nepal PM Policy
Kathmandu: Nepal Prime Minister Balendra Shah, popularly known as Balen Shah, takes the oath of office during a ceremony as Former Interim Prime Minister of Nepal Sushila Karki in Kathmandu on Friday, March 27, 2026. (Photo: IANS)

प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने जानबूझकर अलग-अलग मौकों पर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका के दूत सर्जियो गोर से मिलने से इनकार कि‍या

Nepal PM Policy नेपाल के प्रधानमंत्री की कूटनीति और नीति पर छ‍िड़ी बहस, जानें क्या है मामला? नई दिल्ली, 11 मई (TNT)। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने जानबूझकर अलग-अलग मौकों पर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अमेरिका के दूत सर्जियो गोर से मिलने से इनकार कि‍या। इसके बाद से काठमांडू में संप्रभुता, प्रोटोकॉल और बड़े साझेदारों के साथ रिश्तों पर असर को लेकर बहस शुरू हो गई है। एक संपादकीय में द काठमांडू पोस्ट ने कहा क‍ि प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की विदेशी अधिकारियों से न मिलने की नीति में और अधिक बारीकी की जरूरत है।

प्रधानमंत्री का यह रुख उनकी उस नीति से जुड़ा है, जिसमें वे विदेशी अधिकारियों से, खासकर मंत्री स्तर से नीचे के लोगों से, एक-से-एक मुलाकात से बचते हैं

Nepal PM Policy संपादकीय में आगे कहा गया, “उन्हें हर विदेशी अधिकारी से मिलना जरूरी नहीं है, लेकिन पूरी तरह से मिलने से इनकार करना भी सही नीति नहीं हो सकती।” यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के संदर्भ में की गई है, जिनमें कहा गया था कि मिस्री की दो दिन की नेपाल यात्रा इसलिए टाल दी गई क्योंकि यह साफ हो गया था कि प्रधानमंत्री शाह उनसे मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाल के कुछ मीडिया हिस्सों में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री का यह रुख उनकी उस नीति से जुड़ा है, जिसमें वे विदेशी अधिकारियों से, खासकर मंत्री स्तर से नीचे के लोगों से, एक-से-एक मुलाकात से बचते हैं।

यह स्थिति लिपुलेख सीमा विवाद को लेकर बढ़े तनाव के बीच और भी चर्चा में आई

Nepal PM Policy यह स्थिति लिपुलेख सीमा विवाद को लेकर बढ़े तनाव के बीच और भी चर्चा में आई है। ‘तिब्बत ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि बालेंद्र शाह का यह इनकार नेपाल के उस विरोध से जुड़ा है, जिसमें उसने भारत-चीन के कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को लिपुलेख दर्रे से होकर जाने पर आपत्ति जताई है। यह विवाद इस बात पर केंद्रित है कि नेपाल का दावा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा का इलाका 1816 की सुगौली संधि के तहत उसका हिस्सा है

एक ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया कि बालेंद्र शाह की ‘समान स्तर की कूटनीति’ एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति

Nepal PM Policy जबकि भारत का कहना है कि यह क्षेत्र उत्तराखंड में आता है और ऐतिहासिक रूप से 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल होता रहा है। एक ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया कि बालेंद्र शाह की ‘समान स्तर की कूटनीति’ एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति है, जिसका मकसद बराबरी के आधार पर बातचीत करना है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, “हाल ही में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा इसी वजह से रद्द हो गई, क्योंकि प्रधानमंत्री से मिलने की उनकी कोशिशों पर कोई जवाब नहीं मिला।”

मिस्री और गोर दोनों मामलों में कैबिनेट के कुछ सदस्य ने प्रधानमंत्री से अपना फैसला बदलने की सलाह दी थी, लेकिन बालेंद्र शाह अपने फैसले पर अड़े रहे

Nepal PM Policy रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मिस्री भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेंद्र शाह को भारत यात्रा का औपचारिक निमंत्रण देने आने वाले थे। अखबार के अनुसार, “मिस्री और गोर दोनों मामलों में कैबिनेट के कुछ सदस्य जैसे स्वर्णिम वागले और शिशिर खनाल ने प्रधानमंत्री से अपना फैसला बदलने की सलाह दी थी, लेकिन बालेंद्र शाह अपने फैसले पर अड़े रहे।” रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री ने पहले एक अनौपचारिक निमंत्रण स्वीकार किया था और दोनों देशों में यात्रा की तैयारी चल रही थी, लेकिन बाद में कहा गया कि वे एक साल तक कोई भी विदेशी यात्रा नहीं करेंगे।

शाह पहले अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर से भी नहीं मिले थे, जिससे उनकी नीति और स्पष्ट हो गई

Nepal PM Policy एक और रिपोर्ट में कहा गया कि शाह पहले अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर से भी नहीं मिले थे, जिससे उनकी नीति और स्पष्ट हो गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बालेंद्र शाह ने गोर से मिलने से भी इनकार किया, हालांकि उनके कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की। इसके बजाय गोर ने नेपाल के विदेश मंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात की। Nepal PM Policy

यह कदम एक नई कूटनीतिक परंपरा स्थापित करने की कोशिश लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे विदेशी साझेदारों के साथ रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं

Nepal PM Policyकाठमांडू के विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम एक नई कूटनीतिक परंपरा स्थापित करने की कोशिश है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे विदेशी साझेदारों के साथ रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री के प्रेस सहायक दीपक दहाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बहुत व्यस्त था। Nepal PM Policy–आईएएनएस एवाई/डीकेपी

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