1सकारात्मक संकेत: India US Trade Deal भारत–अमेरिका व्यापार समझौते की सराहना, कुछ अनसुलझे सवाल अब भी बरकरार

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1सकारात्मक संकेत: India US Trade Dealभारत–अमेरिका व्यापार समझौते की सराहना, कुछ अनसुलझे सवाल अब भी बरकरार

व्यापार समझौते को भारतीय-अमेरिकी बिजनेस लीडर्स ने खुलकर समर्थन दिया

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की सराहना, कुछ अनसुलझे सवाल अभी भी बरकरार वॉशिंगटन, 3 फरवरी (TNT)।India US Trade Deal भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को भारतीय-अमेरिकी बिजनेस लीडर्स ने खुलकर समर्थन दिया है। वहीं, नीति से जुड़े कुछ पुराने जानकारों ने इसे सही दिशा में कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि जब तक समझौते की पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक सावधानी जरूरी है। वेंचर कैपिटल निवेशक और रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी फंडरेजर आशा जडेजा मोटवानी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के भीतर इस समझौते को लेकर पहले से तैयारी चल रही थी।

उन्होंने आईएएनएस को एक इंटरव्यू में बताया, “फरवरी में ही यह साफ़ संकेत मिल चुके थे कि व्यापार समझौता होने वाला है। हालांकि, यह उम्मीद नहीं थी कि यह इतनी जल्दी सामने आ जाएगा।” आशा जडेजा ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव के लिए तैयार होंगे।उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि प्रधानमंत्री मोदी एक ऐसे व्यापार समझौते के लिए तैयार होंगे जो उन्हें रूसी तेल की जगह अमेरिकी तेल या अमेरिकी सहयोगी देशों के तेल का इस्तेमाल करने की इजाज़त दे।India US Trade Deal

वॉशिंगटन भारत को ऊर्जा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बेहद अहम साझेदार

” उन्होंने कहा कि शुल्क यानी टैरिफ को लेकर जो नतीजा निकला है, वह इससे बेहतर हो ही नहीं सकता। उनका यह भी कहना है कि अब वॉशिंगटन भारत को ऊर्जा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बेहद अहम साझेदार मानता है।India US Trade Deal उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते फिर से मजबूत हो गए हैं और दोनों देशों के निजी क्षेत्र को अब बिना देरी के साझेदारी और व्यापारिक समझौते आगे बढ़ाने चाहिए।

India US Trade Deal अमेरिका के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स फॉर ट्रेड डेवलपमेंट रेमंड विकरी ने इस समझौते को थोड़े सतर्क नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पिछले कुछ समय से भारत-अमेरिका रिश्तों में जो गिरावट आ रही थी, वह रुक गई है। उनके मुताबिक, हाल के तनाव की वजह टैरिफ, वीज़ा से जुड़ी दिक्कतें और दूसरे विवाद रहे हैं।

25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए टैरिफ का स्वागत किया

रेमंड विकरी ने 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए टैरिफ का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि यह कटौती किन उत्पादों पर लागू होगी और किन पर नहीं। उन्होंने कृषि, डेयरी, दाल और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार की ओर से बताए जा रहे 500 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त खरीद के आंकड़े पर भी संदेह जताया।

भारत-अमेरिका व्यापार करीब 200 बिलियन डॉलर का

उनका कहना है कि जब मौजूदा India US Trade Dealभारत-अमेरिका व्यापार करीब 200 बिलियन डॉलर का है, तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा लगता है। उन्होंने प्रशासन द्वारा बताए गए मुख्य आंकड़ों पर भी सवाल उठाया, यह कहते हुए कि $500 बिलियन की अतिरिक्त खरीद की बात “एक असाधारण आंकड़ा” है, यह देखते हुए कि वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग $200 बिलियन है।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में भारत और उभरते एशिया इकोनॉमिक्स के चेयर रिक रॉसो ने कहा कि यह India US Trade Dealसमझौता ऐसे साल के बाद हुआ है जिसमें भारी टैरिफ के बावजूद व्यापार अप्रत्याशित रूप से लचीला साबित हुआ। रॉसो ने आईएएनएस को बताया, “इस तथ्य के बावजूद कि 2025 के अधिकांश समय तक आयात पर भारी टैरिफ लगे हुए थे, व्यापार वास्तव में काफी लचीला साबित हुआ है।

पिछले साल लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स सहित छूट से मदद मिली।” रॉसो ने कहा कि “साल के आखिरी महीनों में अमेरिका-भारत व्यापार में थोड़ी गिरावट आई थी। इसमें अमेरिका के पीछे छूटने का जोखिम था क्योंकि भारत ने अन्य भागीदारों के साथ समझौते किए थे। मौजूदा घोषणा संभावित रूप से “पहला चरण” है और इससे भारत में बाजार पहुंच में सुधार होता दिख रहा है क्योंकि भारत से अमेरिकी आयात को अधिक सामान्य टैरिफ स्तरों पर बहाल किया जा रहा है।India US Trade Deal

” ओहियो के रिपब्लिकन नेता नीरज अंटानी ने इस India US Trade Deal सौदे का एक निर्णायक कदम के रूप में स्वागत किया। उन्होंने पारस्परिक टैरिफ कटौती और रूसी तेल खरीद को रोकने के भारत के कदम की ओर इशारा करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि यह अमेरिका-भारत संबंधों के लिए एक महान दिन है क्योंकि हमने एक व्यापार समझौता किया है।” अंटानी ने कहा कि 25 से घटाकर अब 18 प्रतिशत की कटौती भारत के हितों के लिए केंद्रीय थी और इस समझौते को पारस्परिक रूप से फायदेमंद बताया।

उन्होंने ​​कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे दोनों लोकतंत्र एक साथ काम करें। यह India US Trade Deal सौदा एक लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करता है जिसे पिछली सरकारें हल करने में विफल रही थीं।” भारतीय-अमेरिकी उद्यमी योगी चुग ने कहा कि यह समझौता प्रवासी भारतीय कारोबारियों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा। उन्होंने इसे भरोसा बढ़ाने वाला और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में एक रणनीतिक जीत बताया।

India US Trade Dealभारत और अमेरिका पिछले कई वर्षों से एक व्यापक व्यापार समझौते की कोशिश कर रहे थे, लेकिन टैरिफ, बाज़ार तक पहुंच और राजनीतिक मतभेदों की वजह से बातचीत बार-बार अटकती रही। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ता रहा और यह करीब 200 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह घोषणा ऐसे समय पर आई है, जब भारत और अमेरिका ऊर्जा सुरक्षा, अहम खनिज, रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे बड़े रणनीतिक मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। समझौते का पूरा दस्तावेज सामने आने के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। —आईएएनएस एएस/

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