पहाड़ों पर कई ऐसे पौधे और फूल पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल औषधि के रूप में सदियों से किया जाता रहा है. इनमें एक बुरांश का फूल है, जिसका वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है. यह फूल इस वक्त उत्तराखंड समेत कई जगहों के पहाड़ों पर खिला हुआ है. यह नेपाल का राष्ट्रीय फूल भी है.

बुरांश का फूल औषधीय गुणों का खजाना होता है और इसे पहाड़ों पर मिलने वाली संजीवनी बूटी माना जा सकता है. कई रिसर्च में इस फूल को सेहत के लिए रामबाण माना गया है. इस फूल का जूस, स्क्वैश, जैली, अचार और शहद बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. लोगों के लिए यह फूल प्रकृति का वरदान है.

रिसर्चगेट की रिपोर्ट के अनुसार बुरांश के फूल में फाइटोकेमिकल प्रॉपर्टी होती हैं और इसका उपयोग बैक्टीरियल इंफेक्शन, सिरदर्द, डायरिया और फंगल इंफेक्शन के इलाज के रूप में किया जाता रहा है. रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बुरांश के फूल में कई महत्वपूर्ण पॉलीफेनोलिक और बायोएक्टिव कंपाउंड होते हैं.

इस फूल में सैपोनिन, फ्लेवोनोइड और स्टेरॉयड जैसे कंपाउंड होने की वजह से इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. इस फूल में एंटीडायबिटिक गुण भी पाए जाते हैं और डायबिटीज के मरीजों के लिए इस फूल का सेवन करना बेहद लाभकारी माना जा सकता है. फूलों में फेनोलिक यौगिकों की उपस्थिति इसके औषधीय गुणों को बढ़ाती है.

बुरांश के फूलों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-नोसिसेप्टिव और हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण भी पाए जाते हैं. इसकी वजह से इन फूलों का उपयोग फंगल इंफेक्शन के इलाज के लिए भी किया जाता है. इस खास फूल को एंटी-एलर्जी समस्याओं के खिलाफ भी प्रभावी माना जाता है. इसका कई तरीकों से सेवन किया जा सकता है.

रोडोडेंड्रोन पौधे की पत्तियां एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती हैं. बुरांश के सूखे पत्तों में गठिया का इलाज करने की क्षमता होती है. इन पत्तियों का उपयोग बुखार और सिरदर्द के इलाज में भी किया जाता है. बुरांश की पत्तियों का उपयोग दांत दर्द से राहत पाने, सर्दी खांसी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा के इलाज के लिए किया जा सकता है. (All Photos Credit- Ankit Katiyar)


