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चंडीगढ़3 घंटे पहले
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फाइल फोटो
पांच व तीन वर्षीय लॉ कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा खारिज करने के पंजाब यूनिवर्सिटी के फैसले को चुनौती संबंधी याचिका बुधवार को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस अशोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यूनिवर्सिटी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह जनहित में लिया फैसला है, जिसमें दखल की जरूरत नहीं है।
कोविड-19 के चलते सिर्फ इस साल के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित न करने का फैसला लिया गया, जिसे अनुचित नहीं ठहराया जा सकता। इस संबंध में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पंजाब यूनिवर्सिटी के 1 अक्टूबर के फैसले को खारिज करने की मांग की गई, जिसमें सभी प्रोफेशनल कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा न कराए जाने का फैसला लिया गया।
छात्रों की तरफ से मांग की गई कि देशभर में लॉ कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है तो फिर पीयू यह परीक्षा आयोजित क्यों नहीं कर सकती? याचिका में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि कोर्ट ने पीयू को इस मामले पर नए सिरे से फैसला लेने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके पीयू अपने पहले लिए फैसले पर ही कायम रहा।
इसके बाद पीयू ने फिर से हाईकोर्ट में कहा कि वे अपने फैसले पर दोबारा विचार करेंगे, लेकिन एक बार फिर से प्रवेश परीक्षा नहीं कराने के फैसले को बनाए रखा गया। ऐसे में यूनिवर्सिटी का यह फैसला उन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है, जो प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। हाईकोर्ट ने अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए यूनिवर्सिटी के फैसले को सही ठहराया।
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