यूपी के वृंदावन स्टेशन से सुबह 10 बजे ट्रेन चली और जल्द ही उसने 160 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पकड़ ली. ट्रेन अपनी फुल स्पीड में जा रही थी और अचानक सामने का सिग्नल लाल हो गया. ड्राइवर भी पता नहीं किस धुन में था कि उसने ब्रेक ही नहीं लगाई. उसकी निगाह सामने पड़ी तो सांसें थम सी गई. देखने वालों को भी लगा कि आज तो कुछ अनहोनी हो जाएगी. तभी चमत्कार हुआ और ट्रेन अपने आप सिग्नल से 30 मीटर पहले ही रुक गई.
दरअसल, यह सारा मामला रेलवे के नए सेफ्टी सिस्टम कवच (Kavach) के ट्रायल का है. इसे सेमी हाई स्पीड इंजन के साथ किया गया. नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के आगरा डिवीजन में रेलवे ने यह ट्रायल किया है. रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) की ओर से विकसित किया गया कवच सिस्टम किसी आपात स्थिति में खुद ही ट्रेन को रोकने के लिए बनाया गया है. रेलवे इसे अपने सभी डिवीजन और रूट पर अप्लाई कर रहा है, जिसका लगातार ट्रायल किया जा रहा है.
कैसे काम करता है कवच
कवच सिस्टम उस परिस्थिति में खुद ही ब्रेक अप्लाई कर देगा, जबकि ड्राइवर आपात स्थिति में ऐसा करने में विफल रहता है. नॉर्थ सेंट्रल रेलवे सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर व डिप्टी चीफ कुश गुप्ता का कहना है कि सेमी हाई स्पीड इंजन WAP-5 में कवच सिस्टम लगाया गया और पलवल-मथुरा रूट पर इसका ट्रायल किया. आगरा रेल डिवीजन की पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि यह इंजन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल सकता है.
कैसे किया गया ट्रायल
पीआरओ ने बताया कि ड्राइवर को लाल सिग्नल देखने के बावजूद ब्रेक नहीं लगाने के लिए बोला गया था. हम देखना चाहते थे कि क्या कवच खुद ही ब्रेक लगाता है और ट्रेन को सिग्नल से पहले रोक सकता है. हमारी पूरी टीम यह देखकर खुशी से भर उठी कि सिग्नल से 30 मीटर पहले ही कवच ने ट्रेन को रोक दिया. WAP-5 इंजन का इस्तेमाल शताब्दी और गतिमान जैसी सेमी हाई स्पीड ट्रेनों में किया जाता है, जो 160 किलोमीटर की स्पीड से भाग सकता है.
जल्द पैसेंजर कोच के साथ ट्रायल
पीआरओ ने बताया कि अभी तो हमने सिर्फ इंजन दौड़ाकर इसका ट्रायल किया है, लेकिन जल्द ही इंजन के साथ पैजेंसर कोच जोड़कर कवच का ट्रायल किया जाएगा. आगरा डिवीजन ने मथुरा से पलवल तक 80 किलोमीटर की रेंज में कवच सिस्टम को फिट कर दिया है. कवच सिस्टम को स्टेशन, टॉवर और एंटीना पर भी लगाया गया है. दिल्ली से आगरा तक 125 किलोमीटर के रूट पर 3 भागों में कवच सिस्टम को फिट किया जा रहा है.


