होटल में ठहरा था प्रेमी जोड़ा, कुछ देर बाद आई लड़की की आवाज़ और फिर…

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महाराष्‍ट्र के पुणे जिले के पिंपरी चिंचवाड़ में एक ओयो होटल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर लड़की की गोली मार कर हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोपी प्रेमी ने लड़की को 3 गोली मारी है ज‍िसमें से दो गोली लड़की के सिर पर और एक उसके एक सीने में लगी और उसकी वहीं मौत हो गई. बताया जा रहा है क‍ि लड़की उत्‍तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली थी. पुल‍िस ने आरोपी प्रेमी को ठाणे के पास गिरफ्तार कर लिया है और आज यानी सोमवार को पुणे कोर्ट में पेश करेगी.

मृतका की पहचान 26 वर्षीय वंदना द्विवेदी के रूप में हुई है, जो पुणे में इंफोसिस में टेक्‍न‍िकल एक्‍सपर्ट थी. आरोपी ऋषभ निगम को रविवार देर रात नवी मुंबई (ठाणे) में एक ‘नाकाबंदी’ के दौरान घटना में इस्‍तेमाल हथियार के साथ पकड़ा गया. पुलिस का कहना है क‍ि हत्‍या के बाद आरोपी का होटल से भागने का सीसीटीवी भी उनके पास मौजूद है.

पिंपरी-चिंचवड़ के सहायक पुलिस आयुक्त (वाकाड डिवीजन) विशाल हिरे ने कहा कि शनिवार को एक लड़का और और एक लड़की हिंजेवाड़ी इलाके के एक होटल में गए थे. वहां पर आरोपी लड़के ने लड़की को गोली मारी, तीन गोली मारी है. सीसीटीवी के आधार पर आरोपी पकड़ा गया है. लड़की आरोपी लकड़ी से दूर होना चाहती थी, जिससे लड़का गुस्से में था और उसने हत्या कर दी. पीड़ित लकड़ी लखनऊ की रहने वाली है, सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे.

निगम ने 27 जनवरी को हिंजवडी के लक्ष्मीनगर इलाके में एक होटल का कमरा बुक किया था, जहां वंदना द्विवेदी उससे मिलने गई थी. शुरुआती जांच से पता चलता है कि महिला के काम के लिए पुणे चले जाने के बाद, दोनों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे, इसके कारण शनिवार देर रात होटल के कमरे में विवाद और मारपीट हुई होगी. पुलिस के अनुसार, गुस्से में आकर निगम ने अपनी पिस्तौल निकाली और उस पर गोलियां चलाईं, और वहां से भाग गया. होटल के कर्मचारियों ने रविवार को महिला के खून से लथपथ शरीर को गोलियों के निशान के साथ देखा और पुलिस को सूचित किया, जिसने तुरंत जांच शुरू की और निगम को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया.

रविवार सुबह मुंबई जाते समय उसे रोका गया, उसके पास से हत्या का हथियार भी बरामद किया गया और देर रात उसे पिंपरी चिंचवड़ पुलिस को सौंप दिया गया. निगम ने हत्या की बात कबूल कर ली है और उसे सोमवार को रिमांड के लिए पुणे कोर्ट में पेश किया जाएगा. लॉज के कर्मचारियों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने गोलियां चलने की आवाज नहीं सुनी, क्योंकि 27 जनवरी को नवी मुंबई में मराठा आरक्षण आंदोलन खत्‍म होने के बाद आसपास के क्षेत्र में जश्न मनाया जा रहा था।

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