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सुपौल20 मिनट पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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जदयू प्रत्याशी विजेंद्र यादव के खिलाफ तेजस्वी यादव ने नहीं किया प्रचार।
- मतदान के पहले ही हार तय मान रही कांग्रेस, कारण सामने ला रहा भास्कर
- मंत्री और जदयू प्रत्याशी विजेंद्र यादव 10 ही बार निकले क्षेत्र, फिर भी निश्चिंत
सुपौल MY बहुल विधानसभा सीट है। उसमें भी यादव प्रत्याशी हो और पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, तभी कोई मौजूदा सरकार के ऊर्जा मंत्री विजेंद्र यादव को क्षेत्र में ‘ऊर्जा’ लगाने के लिए विवश कर सकता है। सुपौल में यह बात सभी कहते हैं, फिर भी यह सीट महागठबंधन में राजद ने कांग्रेस के लिए छोड़ दी और स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव ने इस ओर रुख ही नहीं किया। एक सभा नहीं की। हालत यह है कि कांग्रेस के पुराने लोग मतदान के पहले ही हार तय मान रहे हैं और सामने विजेंद्र यादव भी जीत के लिए निश्चिंत हैं। जदयू के लोग बताते हैं कि क्षेत्र में कुल मिलाकर 10 बार ही निकले हैं विजेंद्र यादव। दूसरी तरफ, कांग्रेस प्रत्याशी मिन्नत रहमानी अपने स्तर से पूरी ताकत झोंक नई इबारत लिखने का दावा जरूर कर रहे हैं।
लालू यादव और विजेंद्र यादव के रिश्ते को निभा रहे हैं तेजस्वी
तेजस्वी यादव लालू प्रसाद और विजेंद्र यादव के पुराने रिश्ते को निभा रहे हैं। तभी तो पूरे चुनाव में ताबड़तोड़ रैली और चुनावी सभा करने वाले तेजस्वी यादव ने सुपौल की ओर झांका ही नहीं। आसपास के इलाकों में तेजस्वी यादव ने सभाएं कीं, लेकिन सुपौल को छोड़ दिया। सुपौल के लोग भी कहते हैं, राजद के कैडर भी और कांग्रेस प्रत्याशी से जुड़े लोग भी, कि विजेंद्र यादव के रिश्ते लालू यादव के परिवार से बेहतर रहे हैं, इसलिए यहां फ्रेंडली फाइट है। हालांकि, ‘फाइट’ शब्द जोड़ने के लिए राजद के लोग तैयार नहीं दिखते। राजद से जुड़े लोग कहते है कि जब विजेंद्र बाबू जनता दल में थे, तब भी लालू यादव उनका सम्मान करते थे और आज जब जदयू में हैं, तब भी दोनों के संबंध मधुर हैं। यही वजह रही है कि तेजस्वी यादव ने विजेंद्र यादव के खिलाफ चुनावी सभा नहीं की। महागठबंधन से कांग्रेस ने प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष मिन्नत रहमानी को उतारा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक तेजस्वी यादव ने सुपौल के लिए केवल एक बार ऑनलाइन सभा की थी। उसमें भी राजद के कैडर को कोई क्लियर मैसेज नहीं दिया था।
जदयू को महागठबंधन में ले गए थे, निकले तो विरोध किया था
विजेंद्र यादव नीतीश कुमार के सामने भी खरी-खरी बात कहने वालों में से चुनिंदा नेता हैं। जब नीतीश कुमार जदयू को महागठबंधन में ले गए थे, तो विजेंद्र यादव की बड़ी भूमिका रही थी। फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब महागठबंधन छोड़ने का फैसला लिया था तो विजेंद्र यादव ने इसका विरोध किया था। कई जगहों पर नीतीश कुमार को विजेंद्र यादव सीधे भी बोलने के लिए जाने जाते हैं। पिछले दिनों जब एनडीए में सीटों का बंटवारा फंस रहा था तो विजेंद्र यादव ने नीतीश से साफ कहा था कि जेडीयू को अपना अलग स्टैंड लेना चाहिए।
आठवीं बार मैदान में, आठ बार ही निकले सभा करने
सुपौल विधानसभा क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी विजेंद्र यादव आठवीं बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। सुपौल में यादवों और मुसलमानों का वोट बैंक 35 फीसदी है। राजद MY समीकरण के लिए ही जानी जाती है। ऐसे में तेजस्वी यादव का इस क्षेत्र में चुनाव प्रचार नहीं करना कांग्रेस को बुरा लग रहा है। जदयू के कद्दावर नेता विजेंद्र प्रसाद यादव अपने क्षेत्र सुपौल से इतने निश्चिंत हैं कि उन्होंने पूरे सुपौल में केवल 8 सभाएं की हैं। विजेंद्र यादव डोर टू डोर कैंपेन नहीं करते हैं। इस बार भी नहीं किया। 8 सभाओं के अलावा वह दो ही बार निकले। एक बार नॉमिनेशन के लिए और दूसरी बार प्रधानमंत्री की सभा में, यानी कुल मिलाकर 10 बार।
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