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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत एक शख्स को ” स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट ” के बिना ” नाबालिग के स्तन काटे जाने ” को यौन हमला नहीं कहा जा सकता। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा मामले का उल्लेख किए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।
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