Sitamarhi (Bihar) Third Phase Assembly Election 2020 Voting; Government Arrangement In Polling Booth | मतदान कर्मियों को रात भर बैठकर मारना पड़ेगा मच्छर; बूथ पर न खाने-पीने का उपाय, न सोने की व्यवस्था

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सीतामढ़ी4 घंटे पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

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सीतामढ़ी के सौरभौर परिहार का मतदान केंद्र, जहां ठहरे हैं मतदानकर्मी।

  • सीतामढ़ी में तीसरे चरण का चुनाव, सरकारी व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है बूथों पर
  • बूथ पर पहुंचकर मतदान कर्मी और सुरक्षा बल ढूंढ रहे जान-पहचान का आदमी

बूथ पर बड़ी मुश्किल है। यहां न खाने का इंतजाम और न सोने की व्यवस्था। मच्छर तो दिन में ही खून चूस रहे हैं। पोलिंग ऑफिसर बूथ पर आकर भटक रहे हैं। गांव के लोग तरस खा गए तो ठीक, नहीं तो मतदान के एक दिन पहले वाली रात परेशानी भरी होगी। सीतामढ़ी के परिहार विधानसभा के समसी कन्हवा गांव में ऐसा ही हाल दिखा। यहां जवानों के साथ मतदान कर्मी भी चाय-पान की दुकानों पर भटकते रहे।

बूथ का हाल, मतदान कर्मी बेहाल
सीतामढी के परिहार विधानसभा में बूथ संख्या 199, 199 क और 203 बूथ बनाए गए हैं। तीन बूथों पर दो हजार वोटर हैं। यहां 12 मतदान कर्मी और 12 सुरक्षा बल तैनात हैं। शाम 5 बजे तक यहां कोई व्यवस्था नहीं थी। उत्क्रमित मध्य विद्यालय सौरभौर परिहार में रसोइया सुखरी सिंह का कहना है कि जो व्यवस्था है, उसमें वह काम चलाएंगे। मतदान कर्मियों के लिए बिस्तर तक की व्यवस्था नहीं है। ठंड में फर्श पर सोना मुश्किल पड़ेगा। बटालियन वाली फोर्स के लिए तो जैसे-तैसे बटालियन की व्यवस्था मिल जाती है, लेकिन बिहार पुलिस के जवान प्रसाशन की व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।

स्कूल का चूल्हा है सहारा
मतदान कर्मियों के लिए स्कूल का चूल्हा ही पेट की आग बुझाने का सहारा होता है। मनपौत गांव में भी मतदान केंद्र सरकारी स्कूल को बनाया गया है, लेकिन यहां रसोइया कब आएगा और कब चूल्हा जलेगा, कोई बताने वाला नहीं। मतदान कर्मी फोर्स के साथ दोपहर में ही पहुंच गए, लेकिन गांव से रसोइया नहीं आया। अब सवाल यह है कि रात का खाना कौन खिलायेगा, मच्छर से बचाव का उपाय क्या होगा। बिस्तर के बिना रात कैसे बीतेगी। इन सारी समस्याओं को लेकर निर्वाचन कर्मी परेशान दिखे। एक मतदान कर्मी ने बताया कि साथ पढ़ा एक लड़का यहीं व्यापार करता है। शाम का खाना और दरी लेकर आ जायेगा, लेकिन रात स्कूल की व्यवस्था में कैसे बीतेगी, यह बड़ा सवाल है।

गांव वाले बन जाते हैं मददगार
सीतामढी के गोरहारी चौक के पास भी पुलिस का बड़ा चेकपोस्ट बनाया गया है। नेपाल सीमा से लगने वाला यह इलाका चुनाव के लिए अहम है। यहां व्यवस्था के नाम पर कुछ नहीं है। होटल और चाय-पानी की दुकान भी यहां रात में नहीं खुलती है। शाम 6 बजे से संन्नाटा हो जाता है। सड़क पर इक्का-दुक्का लोग ही दिखते हैं। चुनाव है तो थोड़ी भीड़ है, लेकिन चाय-पानी का होटल बंद हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय के बूथ पर जब मतदान कर्मी पहुंचे तो आसपास के लोग पानी-बिस्किट का पैकेट लेकर पहुंच गए। मतदान कर्मी रमेश ने बताया कि गांव वाले बहुत अच्छे हैं, सत्कार का भाव दिखा है। आसपास के लोगों का कहना है खाना-पानी की भी व्यवस्था करने की बात कह रहे हैं, लेकिन आयोग का निर्देश है कि किसी से प्रभावित नहीं होना है।

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