राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े एक मुद्दे को उठाया
राज्यसभा में मोबाइल डेटा प्लान्स का विषय, राघव चड्ढा ने कहा- कंपनियां कर रही हैं अनयूज्ड डेटा की लूट Raghav Chadha data plan नई दिल्ली, 22 मार्च (TNT)। राज्यसभा में आप सांसद राघव चड्ढा ने मोबाइल फोन यूजर्स से जुड़े एक मुद्दे को उठाया गया। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर रोजाना डेटा प्लान्स के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से लूटे जा रहे हैं। सोमवार को इस विषय पर बोलते हुए उन्होंने इस पूरी व्यवस्था को उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
“टेलीकॉम कंपनियों के प्लान्स
Raghav Chadha data plan सांसद ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब कोई यूजर अपना मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे उसके प्लान के अनुसार प्रतिदिन 1.5 जीबी, 2 जीबी या 3 जीबी डेटा मिलता है। लेकिन यह डेटा ‘डेली लिमिट’ के रूप में होता है, जो हर दिन रात 12 बजे समाप्त हो जाता है। यदि उस दिन का पूरा डेटा उपयोग नहीं हुआ, तो बचा हुआ डेटा स्वतः समाप्त (फॉरफिट) हो जाता है और अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता।
Raghav Chadha data plan राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूरे डेटा का पैसा देता है, तो उसे पूरा डेटा उपयोग करने का अधिकार क्यों नहीं मिलता। इस व्यवस्था को उन्होंने एक उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा, यदि किसी व्यक्ति ने महीने की शुरुआत में अपनी गाड़ी में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया और महीने के अंत तक केवल 15 लीटर ही उपयोग हुआ, तो क्या पेट्रोल पंप वाला बचा हुआ 5 लीटर वापस ले लेगा? इसका जवाब है, नहीं, क्योंकि उपभोक्ता ने पूरे 20 लीटर का भुगतान किया है।
उपभोक्ता अधिकार कानून
Raghav Chadha data plan ठीक उसी प्रकार, मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए और उसे समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले प्लान को बढ़ावा देती हैं, जबकि ‘मंथली डेटा लिमिट’ वाले प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं। उनका तर्क था कि यदि मासिक डेटा सीमा हो, तो उपभोक्ता पूरे महीने में अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम डेटा उपयोग कर सकता है, जिससे कंपनियों को कम फायदा होता है। यही कारण है कि कंपनियां दैनिक सीमा वाले प्लान को प्राथमिकता देती हैं।
राघव चड्ढा ने इसके समाधान के लिए तीन सुझाव व मांगे रखी
Raghav Chadha data plan उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने इसे ‘डिजिटल ऑक्सीजन’ बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, कामकाज, बैंकिंग और संचार लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट की आवश्यकता है। ऐसे में रोजाना लाखों जीबी डेटा का यूज न होने के बावजूद समाप्त हो जाना एक गंभीर चिंता का विषय है। राघव चड्ढा ने इसके समाधान के लिए तीन सुझाव व मांगे रखी। उन्होंने कहा कि हर यूजर को डेटा कैरी फॉरवर्ड की सुविधा दी जाए।
किसी यूजर के पास बचा हुआ डेटा है, तो वह उसे अपने परिवार या अन्य लोगों को ट्रांसफर कर सके
Raghav Chadha data plan यानी दिन के अंत में जो डेटा बच जाए, वह अगले दिन के डेटा में जुड़ जाए और उसकी वैलिडिटी समाप्त न हो। दूसरा, यदि महीने के अंत में काफी मात्रा में डेटा बच जाता है, तो यूजर को यह विकल्प दिया जाए कि वह उस अनयूज्ड डेटा की वैल्यू को अगले रिचार्ज में समायोजित (एडजस्ट) कर सके। यानी अगले महीने के रिचार्ज में उसे छूट मिले, ठीक वैसे ही जैसे बिजली के बिल में केवल उपयोग किए गए यूनिट के अनुसार भुगतान किया जाता है। तीसरा, अनयूज्ड डेटा को डिजिटल एसेट माना जाए और उसे ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाए।
Raghav Chadha data plan यानी यदि किसी यूजर के पास बचा हुआ डेटा है, तो वह उसे अपने परिवार या अन्य लोगों को ट्रांसफर कर सके। सांसद ने कहा कि यह मुद्दा अब केवल डेटा का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल न्याय का है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाए, ताकि देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को उनका हक मिल सके। —आईएएनएस जीसीबी/एएस


