श्रद्धांजलि के अश्रु: Pulwama Attack 7th Anniversary पुलवामा हमला की 7वीं बरसी पर शहीदों को नमन, परिवारों ने याद किए अपने वीर सपूत

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श्रद्धांजलि के अश्रु: Pulwama Attack 7th Anniversary पुलवामा हमला की 7वीं बरसी पर शहीदों को नमन, परिवारों ने याद किए अपने वीर सपूत

पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे

पुलवामा हमले की 7वीं बरसी : नम आंखों से शहीदों को नमन, परिवारों ने याद किए अपने वीर सपूत Pulwama Attack 7th Anniversary नई दिल्ली, 14 फरवरी (TNT)। साल वर्ष पहले पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सैनिकों के परिवारजनों की आंखें आज भी नम हैं। सातवीं बरसी पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। पंजाब के अलग-अलग जिलों में शहीद जवानों के परिवारों ने अपने वीर सपूतों को याद किया। गुरदासपुर के दीनानगर में सीआरपीएफ कांस्टेबल मनिंदर सिंह की शहादत की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा रखी गई।

7वीं बरसी पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम

Pulwama Attack 7th Anniversary कार्यक्रम में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरप्रीत सिंह, कर्नल विश्वनाथ (25 एमएसी यूनिट) और लेफ्टिनेंट बी.एस. नेगी (3 जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री) समेत कई लोगों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। मनिंदर सिंह के भाई लखविश सिंह अत्री ने उस दिन को याद करते हुए बताया कि जब छुट्टी खत्म करके जवान 14 फरवरी 2019 को अपनी ड्यूटी पर लौट रहे थे, पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे और मेरा भाई भी उनमें से एक था।

मेरे भाई ने देश के लिए अपना बलिदान दिया

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में लखविश सिंह अत्री ने कहा, “घर में चल रहे काम को लेकर उनसे आखिरी बात हुई थी। Pulwama Attack 7th Anniversary वे उस समय जम्मू पहुंचे थे। शाम को समाचारों से पता चला कि पुलवामा में आतंकी हमला हुआ है। इससे मुझे भी अपने भाई की चिंता हुई थी। मैंने भाई को फोन किया, लेकिन वह बंद था। लगभग आधे घंटे बाद यह पुष्टि हुई कि हमले में मेरा भाई भी शहीद हुआ है। हमें दुख था, लेकिन इस बात का गर्व भी था कि मेरे भाई ने देश के लिए अपना बलिदान दिया है।

Pulwama Attack 7th Anniversary” उन्होंने बताया, “मैं और मेरा भाई हम दोनों एक साथ सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग के बाद मुझे असम भेजा गया था और मेरे भाई की ड्यूटी जम्मू में लगी थी।” मनिंदर सिंह के पिता सतपाल अत्री ने कहा, “आज उन्हें शहीद हुए 7 साल हो गए। मुझे आज भी लगता है कि वह आकर मेरे गले लगेगा। वह बहुत काबिल था और हमेशा अच्छा परफॉर्म करता था। बेटा अक्सर टॉप पोजीशन हासिल करता था या अपनी क्लास में फर्स्ट आता था। इसकी अफसर बनने की इच्छा थी और इसके लिए वह सीआरपीएफ में नौकरी करते हुए पढ़ाई करता रहा।

उसी कारण उसने शादी नहीं की थी।” कांस्टेबल मनिंदर सिंह की बहन शबनम अत्री कहती हैं, “उनकी शहादत के बाद ऐसा लगा जैसे हमारी पूरी दुनिया खत्म हो गई हो। वह परिवार में सभी का बहुत ख्याल रखते थे, और उनके बिना हम सभी के लिए जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है।” शहीद जवानों में श्री आनंदपुर साहिब के रौली गांव के निवासी कुलविंदर सिंह भी शामिल थे। शहादत की बरसी पर कुलविंदर सिंह के परिवारजन उनके बलिदान को सम्मानपूर्वक याद कर रहे हैं।Pulwama Attack 7th Anniversary उनकी स्मृति में शहीद की प्रतिमा स्थापित की गई है।

हमारे लिए 14 फरवरी एक काला दिन बनकर उभरा

नम आंखों से बेटे को याद करते हुए शहीद कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह ने कहा, “वह मेरा अकेला बेटा था। Pulwama Attack 7th Anniversary हमारे लिए 14 फरवरी एक काला दिन बनकर उभरा, जिसे हम कभी नहीं भूल सकते। फिर भी हमें गर्व है कि हमारे बेटे ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।” इसी तरह, मोगा में शहीद जयमल सिंह के परिवार ने भी नम आंखों से उन्हें याद किया है। बेटे जयमल सिंह को याद करते हुए मां सुखजीत कौर की आंखें भर आईं।

उन्होंने कहा कि मेरे लिए जीना मुश्किल हो गया है। मुझे अपने बेटे की बहुत याद आती है। पत्नी सुखजीत कौर ने कहा, “हम आज भी उस दिन को नहीं भूल पाए हैं। जब भी हम उसे याद करते हैं, वह दृश्य हमारी आंखों के सामने आ जाता है।” उन्होंने कहा कि उनके बिना जिंदगी बेहद मुश्किल बन चुकी है। पत्नी ने मांग की कि जयमल सिंह ने जिस स्कूल में पढ़ाई की थी, उसका नाम शहीद के नाम पर होना चाहिए। Pulwama Attack 7th Anniversary–आईएएनएस डीसीएच/

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