Pathankot 257th in cleaning, Dustbin kept for three years in the reason-corporation office was not distributed | सफाई में पठानकोट 257वें स्थान पर, कारण-निगम दफ्तर में तीन साल से रखे डस्टबिन बांटे ही नहीं गए

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पठानकोट20 घंटे पहले

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  • स्वच्छता सर्वेक्षण में पठानकोट हर साल क्यों पिछड़ता जा रहा है, हकीकत देखिए…
  • कूड़ा अलग रखने के लिए 2016 में शुरू हुई थी ग्रीन और ब्लू रंग के डस्टबिन बांटने की मुहिम

नगर निगम ने साल 2016 में घरों में ग्रीन और ब्ल्यू रंग के डस्टबिन बांट गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग कर उससे खाद बनाने के लिए वेस्ट पिकर के जरिए उठाने की मुहिम शुरू की थी। इसके तहत सामाजिक संगठनों से डस्टबिन भी इकट्ठा किए गए, लेकिन पिछले तीन साल से 30 बोरों में बंद पड़े डस्टबिनों पर धूल जमी है।

निगम के पूर्व मेयर अनिल वासुदेवा ने भी स्वच्छता सर्वेक्षण 2020-21 के सर्वे को लेकर अफसरशाही की गंभीरता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि केंद्र की ओर से निगम को करोड़ों रुपए स्वच्छता मुहिम के तहत फंड दिया है। अधिकारी उसका जुटिलाइजेशन सही तरीके से करें। हालांकि, निगम अधिकारी कहते हैं कि कुछ डस्टबिन बांटे गए हैं और सरकारी दफ्तरों में रखवाए गए हैं। बता दें कि 2016 में डोर डू डोर कूड़े की कलेक्शन की मुहिम शुरू की गई थी। इसके तहत 5 जून 2017 से निगम की ओर से शहर के प्रत्येक घर में ग्रीन और ब्लू रंग के डस्टबिन बांटने का ऐलान किया गया था। इसके तहत निगम की ओर से लगाए गए वेस्ट पिकर लोगों के घर जाएंगे और ग्रीन एवं ब्लू डस्टबिन को लिफ्ट करने के बाद वापस छोड़ेंगे। इसके लिए निगम को सामाजिक संगठनों से ढाई हजार से ज्यादा डस्टबीन भी मिले हैं। बता दें कि, स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 की रैंकिंग में देशभर में पठानकोट 257वें स्थान पर रहा है।

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स्वच्छता मुहिम के लिए केंद्र से निगम को करोड़ों रुपए मिलते हैं लेकिन निगम अधिकारी गंभीर नहीं : पूर्व मेयर

पूर्व मेयर अनिल वासुदेवा का कहना है कि 2016 की योजना के तहत 2017-18 तक 90 फीसदी रैक पिकर के जरिए कूड़ा उठवाया जाना शुरू कर दिया गया था, लेकिन अब फिर से स्थिति पहले जैसी हो गई है, ऐसा तब है जब स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। केंद्र ने स्वच्छता मुहिम के तहत निगम को करोड़ों रुपए दिए हैं। उसका जुटिलाइजेशन अफसरों को सही तरीके से करना चाहिए। दूसरी तरफ, व्यापार मंडल के प्रधान नरेश अरोड़ा का कहना है कि रोड पर रोजाना कूड़ा उठाने के लिए ट्रालियां आती हैं, लेकिन डस्टबिन किसी भी दुकानदार को नहीं मिले हैं।

सफाई में पठानकोट कहां

साल 2020 की स्वच्छता रैंकिंग में पठानकोट 1 से 10 लाख आबादी वाले 382 शहरों की रैंकिंग में 257 और स्टेट के 14 शहरों में 10वें स्थान पर आया है। साल 2019 में पठानकोट 7वें और नेशनल रैंकिंग में 171वें नंबर पर था। साल 2018 में 9वां और नेशनल में 243 रैंकिंग थी, जबकि साल 2017 में चौथा और नेशनल में 188वां रैंक मिला था।

लॉकडाउन के चलते नहीं बंटे डस्टबिन

निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर जानू चलोत्रा ने कहा कि दफ्तरों में डस्टबिन रखवाए गए हैं और चुनाव के बाद फिर लॉकडाउन लगने की वजह से डस्टबिन बांटे नहीं जा सके हैं, इसलिए दफ्तर में रखे गए हैं। उन्हें अब दुकानदारों को बंटवाया जाएगा।

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