बड़ा खुलासा! ईरानी युद्धपोत को लेकर पाकिस्तान ने फैलायी झूठी खबर, AI से बनाया फर्जी वीडियो Pakistan AI Fake Video Iran Warship

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बड़ा खुलासा! ईरानी युद्धपोत को लेकर पाकिस्तान ने फैलायी झूठी खबर, AI से बनाया फर्जी वीडियो Pakistan AI Fake Video Iran Warship
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भारत ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena की लोकेशन से जुड़ी जानकारी इजरायल को दी थी

पाकिस्तान ने ईरानी युद्धपोत को लेकर फैलाई झूठी खबर, एआई से बनाया फर्जी वीडियो Pakistan AI Fake Video Iran Warship नई दिल्ली, 9 मार्च (TNT) हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया। इस वीडियो में यह दावा किया गया कि भारत ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना की लोकेशन से जुड़ी जानकारी इजरायल को दी थी। हालांकि यह बात पूरी तरह झूठ और भ्रम फैलाने वाली है। आधिकारिक स्रोतों के अनुसार यह झूठी खबर फैलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक फर्जी वीडियो तैयार किया गया।

पाकिस्तानी एजेंसी से संबंधित सोशल मीडियाअकाउंट्स ने इस फर्जी वीडियो को बढ़ावा दिया

Pakistan AI Fake Video Iran Warship पाकिस्तानी एजेंसी से संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इस फर्जी वीडियो को बढ़ावा दिया। इसके माध्यम से लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। दरअसल इस भ्रामक व फर्जी सामग्री को पाकिस्तान के इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा फैलाया गया। आईएसपीआर का इकोसिस्टम इस झूठ में संलिप्त है। यह जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण फैलाने के इरादे से किया गया कृत्य था। यह पूरी कार्रवाई पाकिस्तान के इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन से जुड़े दुष्प्रचार पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं।

जिसमें रायसीना वार्ता में सेना प्रमुख के भाषण की एक फुटेज का उपयोग

Pakistan AI Fake Video Iran Warship इन खातों ने डिजिटल रूप से बदले गए वीडियो के माध्यम से भारत के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश की। यह वीडियो एआई द्वारा निर्मित और डिजिटल रूप से परिवर्तित है, जिसमें रायसीना वार्ता में सेना प्रमुख के भाषण की एक फुटेज का उपयोग किया गया है। इस फुटेज को जानबूझकर भ्रामक कहानी गढ़ने के लिए एडिट किया गया है। फर्जी वीडियो के जरिए यह दावा कि भारत ने जहाज की लोकेशन इजरायल के साथ साझा की। हालाँकि यह बात पूरी तरह से झूठ और निराधार है।

सेनाध्यक्ष का असली भाषण कुछ और है लेकिन उसको एडिट करके भ्रामक बना दिया गया

Pakistan AI Fake Video Iran Warship यह वीडियो दर्शकों को गुमराह करने और भारत की विश्वसनीयता को निशाना बनाने के उद्देश्य से किए गए एक समन्वित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है। भारत ने ईरानी युद्धपोत को लेकर फैलाए गए भ्रामक दावे का खंडन किया है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया के फैक्ट चेक में आधिकारिक स्तर पर इस दावे को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया गया है। फैक्ट चेक में यह स्पष्ट दिखाया गया है कि सेनाध्यक्ष का असली भाषण कुछ और है लेकिन उसको एडिट करके भ्रामक बना दिया गया है।

भारत द्वारा ईरानी युद्धपोत की लोकेशन इजरायल को बताने का दावा पूरी तरह आधारहीन

Pakistan AI Fake Video Iran Warship यह झूठा वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से तैयार किया गया है। जांच में पाया गया कि वीडियो में एक आधिकारिक भाषण की फुटेज का उपयोग किया गया और उसे संपादित कर ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया मानो भारत ने ईरानी जहाज की स्थिति साझा की हो। आधिकारिक तथ्य-जांच में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत द्वारा ईरानी युद्धपोत की लोकेशन इजरायल को बताने का दावा पूरी तरह आधारहीन है।

किसी भी वीडियो या दावे को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें

Pakistan AI Fake Video Iran Warship संबंधित वीडियो को कृत्रिम रूप से तैयार और संपादित किया गया है, जिसका उद्देश्य दर्शकों को भ्रमित करना और भारत की विश्वसनीयता को प्रभावित करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरों का उपयोग कर दुष्प्रचार फैलाने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी कारण डिजिटल मंचों के लिए यह आवश्यक है कि वे ऐसे कृत्रिम रूप से बनाए गए या संपादित की गई सामग्री की पहचान करें और उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित करें।

Pakistan AI Fake Video Iran Warship जनता और मीडिया संस्थानों से भी अपील की गई है कि किसी भी वीडियो या दावे को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें, ताकि झूठी और भ्रामक जानकारी के प्रसार को रोका जा सके। ऐसी अफवाहों को रोकने के लिए भारत में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े नए नियम लागू किए गए हैं, जिनके तहत कृत्रिम रूप से तैयार सामग्री को स्पष्ट रूप से चिन्हित करना आवश्यक है।

Pakistan AI Fake Video Iran Warship डिजिटल मंचों से अपेक्षा की गई है कि वे ऐसे नियमों का पालन करें ताकि छेड़छाड़ किए गए वीडियो और भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोका जा सके। —आईएएनएस जीसीबी/एएस

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