सेब की खेती करने वाले किसानों को बिहार सरकार 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. सेब की खेती करने वाले किसानों को बिहार सरकार पिछले दो सालों से यह सब्सिडी दे रही है. बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, कटिहार और औरंगाबाद जैसे जिलों में हरमन-99 वेरायटी के सेब के पौधे पिछले दो सालों से लगाए जा रहे हैं. बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही विशेष उद्यानिक फसल योजना के तहत किसानों को सेब की खेती को बढ़ावा देने के लिए इस स्कीम की शुरुआत की गई थी.
आपको बता दें कि बिहार सरकार सेब की बागवानी पर प्रति हैक्टेयर लगभग ढाई लाख रुपये दे रही है. ऐसे में जो भी किसान सेब की खेती करने के लिए सब्सिडी लेना चाहें वह इस योजना से जुड़ सकते हैं. राजेंद्र कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों की मानें तो बिहार में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की तरह मिट्टी नहीं है, लेकिन हरमन- 99 वेरायटी की सेब बिहार के मिट्टी में भी उगाया जा सकता है. इसी को ध्यान में रख कर बिहार के 7-10 जिलों में इस बार भी सेब की खेती के लिए किसानों को अनुदान दिया गया है.

बिहार सरकार सेब की बागवानी पर प्रति हैक्टेयर लगभग ढाई लाख रुपये दे रही है.
यहां भी शुरू हो गया सेब की खेती
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, सेब की खेती के लिए नवंबर से फरवरी तक पौधे लगाए जाते हैं. हरिमन 99 वेरायटी, एना, माइकल, डोरसेट गोल्डन और ट्रिपिकल स्वीट्स जैसी वेराइटी के लिए 40 से 50 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान सही होता है. इस लिहाज से देखें तो अप्रैल से जून-जुलाई का महीना सेबा की फसल के उपयुक्त माना जाता है. सेब के पौधे लगाने के 2 साल बाद फूल आते हैं. दिसंबर और जनवरी में फूल लगते हैं और मई और जून में फल तैयार हो जाते हैं.
सरकार दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी
सरकारी आंकड़ों की मानें तो जम्मू-कश्मीर देश का सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है. यहां सेब के कुल पैदावार के लगभग 70-80 प्रतिशत होता है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी तकरीबन 20- 30 प्रतिशत सेब की खेती होती है. कश्मीर के श्रीनगर, बडगाम, बारामुला, कुपवाड़ा, गांदरबल, शोपियां और अनंतनाग जैसे जगहों पर बड़े पैमाने पर सेब की खेती होती है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती थानाधार, कोटगढ़ और नारकंडा बैल्ट के बाद शिमला जिले के कोटखाई, जुब्बल, चौपाल और रोहड़ू में सेब की खेती सबसे ज्यादा होती है.


