मौजूदा वित्त वर्ष 31 मार्च को समाप्त होने वाला है. ऐसे में टैक्स बचाने की जुगत शुरू हो गई है. आप 31 मार्च तक निवेश कर इनकम टैक्स में बचत (Income Tax Saving) कर सकते हैं. आप अगर कहीं निवेश की योजना बना रहे हैं तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में निवेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
आपको बता दें कि अभी पीपीएफ पर 7.1% ब्याज तो वहीं वीपीएफ में 8.25% की दर से ब्याज मिल रहा है. आइए जानते हैं कि इन दोनों में कहां निवेश करना बेहतर होगा.
पीपीएफ और वीपीएफ में कौन निवेश कर सकता है?
कोई भी भारतीय नागरिक पीपीएफ में निवेश कर सकता है. वहीं, केवल वेतनभोगी कर्मचारी जिनके पास कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) खाता है और नियमित रूप से ईपीएफ में योगदान करते हैं, वे वीपीएफ में खाता खुलवा सकते हैं. यह कोई नए तरह का निवेश नहीं बल्कि आपके ईपीएफ खाते का विस्तार है. चूंकि यह स्वैच्छिक है, वीपीएफ के लिए योगदान ईपीएफ के लिए 12% अनिवार्य योगदान के अतिरिक्त होगा. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वीपीएफ विशेष रूप से वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है, जबकि पीपीएफ में निवेश की सुविधा वेतनभोगी और स्व-रोजगार दोनों तरह के व्यक्तियों को उपलब्ध है.
पीपीएफ और वीपीएफ- कितना कर सकते हैं निवेश?
आप सिर्फ 100 रुपये से पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं. ध्यान रखें कि आपको एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये की राशि जमा करनी होगी. आप एक वित्तीय वर्ष में पीपीएफ में अधिकतम 1,50,000 रुपये निवेश कर सकते हैं. हालांकि, वीपीएफ के लिए कोई न्यूनतम राशि या न्यूनतम वार्षिक निवेश की सीमा नहीं है. आप ईपीएफ और वीपीएफ को मिलाकर अपने मूल वेतन का 100% तक योगदान कर सकते हैं.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वीपीएफ और पीपीएफ के बीच आपकी पसंद पात्रता, व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों जैसे कारकों पर निर्भर करता है. अगर आप सेवानिवृत्ति के लिए बचत कर रहे हैं, तो VPF एक बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि वर्तमान में वीपीएफ पर 8.15% की दर से ब्याज दिया जा रहा है.
वहीं, पीपीएफ पर 7.1% की दर से ब्याज मिल रहा है. यानी पीपीएफ की तुलना में वीपीएफ पर 1% अधिक ब्याज का लाभ लिया जा सकता है. वीपीएफ सेवानिवृत्ति के लिए निवेश करने का एक बेहतर विकल्प है


