In Maham, people are putting dirt in the ponds, now their water is not worth drinking for animals | महम में तालाबों में लोग डाल रहे गंदगी, अब पशुओं के पीने लायक नहीं रहा इनका पानी

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महम15 घंटे पहले

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(रवींद्र मलिक) महम शहर व उसके आस पास स्थित तालाबों का अस्तित्व लगभग खत्म होता जा रहा है। शहर की बाहरी कॉलोनियों में जो लोग पशु रखकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं उन्हें पशुओं को नहलाने व पानी पिलाने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। उनका कहना है कि पेयजल सप्लाई 3 या 4 दिन में आती है।

शहरवासी बलबीर, माहया, दलशेर, किरण, संजीत, विजय, रणसिंह, साहिल, दिनेश व हरमेंद्र का कहना है कि नगर पालिका प्रशासन खुद पुराने तालाबों को सौंदर्यीकरण के नाम पर बंद कर वहां पार्क बनाने पर लगा हुआ है। फरमाणा चुंगी पर मौजूद सैनियों वाला तालाब इसका बेहतर उदाहरण है जहां पार्क बनाने का काम चल रहा है। शहर में केवल पुराने बस स्टैंड पर जलभरत तालाब बचा है मगर इसमें पूरे शहर का गंदा पानी जमा है।

कई सालों से इसकी सफाई नहीं हुई है। शहरवासियों ने आराेप लगाते हुए कहा कि महम बाईपास सैमाण चौक से आगे ढेर पाना वाले तालाब में प्लाट काटने शुरू कर दिए गए हैं। वहां काफी मिट्‌टी भरत किया जा चुका है। मुरंड जोहड, कसाईवाला, घेउवाला तालाब अपना अस्तित्व पहले ही खो चुके हैं।

दो तालाबों का हो रहा सौंदर्यीकरण : नगर पालिका प्रधान फतेह सिंह ने बताया कि दो तालाबों का सौंदर्यीकरण चल रहा है। अन्य तालाब उनके कार्यकाल से पहले ही खत्म हो चुके थे। खुदाई करके नया तालाब कोई बनाया नहीं गया। पशुओं के पीने व नहाने के लिए किसी तालाब में बेहतर पानी नहीं है। बारिश हो जाए तो स्टोरेज के लिए पानी की जगह भी नहीं है।

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