Flood has passed 3 months, 50 thousand hectare land is still submerged, after kharif, crisis on Rabi | बाढ़ बीते हो गए 3 माह, 50 हजार हेक्टेयर जमीन अब भी है डूबी, खरीफ के बाद रबी पर भी संकट

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मुजफ्फरपुरएक दिन पहले

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झपहां में रेलवे लाइन के दाेनों तरफ खेतों में जमा पानी

  • इतना अधिक पानी कि उसे हटाकर खेत की जुताई करना नहीं हो रहा संभव

इस वर्ष अत्यधिक बारिश व खेताें में लगातार जलजमाव ने किसानों का हाल-बेहाल कर दिया है। खरीफ फसल में धान की बुवाई के समय से लगातार बारिश के कारण जिले में धान, मक्का एवं सब्जियों की 126023 हेक्टेयर में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। इसके बाद खेतों में जलजमाव के कारण रबी की बुवाई भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

खेतों की जुताई नहीं होने से तिलहन के बाद अब 50 हजार हेक्टेयर में मक्का एवं गेहूं की बुवाई मुश्किल है। कुल मिलाकर जिले में इस वर्ष अत्यधिक बारिश से कृषि कार्य पूरी तरह चौपट हो गया है। खरीफ फसलों के बर्बाद होने के बाद अब जिले में रबी की बुवाई भी मुश्किल है। खेतों में जलजमाव से इस वर्ष आलू, राई व सरसों की नाममात्र की खेती हुई।

अब मक्का एवं गेहूं की बुवाई का पीक सीजन होने के बाद भी अब तक खेत पानी से भरे हैं। जिले के सभी प्रखंडों के चौर क्षेत्रों में अत्यधिक जलजमाव की स्थिति है। खासकर मीनापुर, औराई, कटरा, गायघाट, सकरा, सरैया साहेबगंज, मोतीपुर प्रखंडों के किसान अधिक परेशान हैं।

शहर के एसकेएमसीएच से आगे एनएच-177 के बगल में झपहां से लेकर हथौड़ी, कटरा एवं गायघाट प्रखंड के खेतों में रवि की बुवाई होना मुश्किल है। मक्का उत्पादन के लिए राज्य में प्रसिद्ध सनाठी, लोहसरी, ठिकही, मधेपुरा समेत आस-पास के गांवाें में इस बार मक्के की बुवाई भी शुरू नहीं हो सकी है।

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