Farmers staged a sit-in at the park 50 meters away from the railway track, farmers who were protesting on the platform after emptying the railway track, moved away from there too. | किसानों ने रेलवे ट्रैक से 50 मीटर दूर पार्क में लगाया धरना, रेलवे ट्रैक खाली कर प्लेटफार्म पर धरना दे रहे किसान अब वहां से भी हटे

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  • किसानों ने रेलवे ट्रैक से दूर 50 मीटर दूर पार्क में बैठकर प्रदर्शन किया, जो किसान रेलवे ट्रैक खाली करने के बाद प्लेटफॉर्म पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, वहां से बहुत दूर चले गए।

मोगाएक दिन पहले

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  • चेतावनी- सिर्फ मालगाड़ी चलेंगी, पैसेंजर ट्रेनें नहीं चलने देंगे
  • बोले- पहले केंद्र ने कहा- पंजाब सरकार रेलवे ट्रैक खाली करवा रेल कर्मियों की सुरक्षा की गारंटी दे, अब नई शर्त- रेलवे से एक किलोमीटर दूर दिया जाए धरना, जो हमें मंजूर नहीं

कृषि कानूनाें के खिलाफ रेलवे ट्रैक पर धरना देने वाले किसान पहले ट्रैक खाली कर पास ही बने प्लेटफार्म पर धरना लगाकर बैठे थे और अब ट्रैक से 50 मीटर दूर बने पार्क में शुक्रवार से धरना दे रहे हैं। शुक्रवार से ही प्लेटफार्म पर पंजाब पुलिस रेलवे मुलाजिमों की सुरक्षा के लिए तैनात है, परंतु केंद्र सरकार के किसानों के धरने रेलवे परिसर से 1000 मीटर (एक किलोमीटर) दूर लगाने की शर्त पर किसान भड़क गए हैं।

किसानाें का कहना है कि पंजाब में केवल मालगाड़ियों को चलाने की 20 नवंबर तक इजाजत दी गई है। अडानी के गोदाम में मालगाड़ी नहीं जाने दी जाएगी। अब हमने धरना भी रेलवे ट्रैक से 50 मीटर दूर कर लिया है। स्टेशन में सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस तैनात कर दी गई है, तो अब मोदी को एक किलोमीटर की दूसरी की शर्त रखकर किसानों के साथ दुश्मन देश के नागरिकों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उनकी मांगें मानने की बजाय शर्तों पर आ गई है। इतिहास गवाह है कि पंजाब के साथ दुश्मन जैसा व्यवहार करने वाला राजा ज्यादा समय नहीं रहा, क्योंकि घमंड की अग्नि से ऐसे लोग स्वयं झुलस जाते हैं।

ठंड से बचने को रजाइयाें का किया प्रबंध

मोगा-फिरोजपुर रोड पर अडानी के गोदाम के बाहर धरना दे रहे किसानों ने संघर्ष को लंबा खिंचते देखकर धरना स्थल पर रजाई/गदेलों का प्रबंध करना शुरू कर दिया है, ताकि बढ़ती ठंड में भी धरना जारी रहे। गाैर हाे कि केंद्र सरकार द्वारा पारित किए 3 कृषि कानूनाें के खिलाफ देशभर के किसानों में रोष है। खासकर पंजाब के किसान जो मजबूत मंडीकरण के साथ ही रहना चाहते हैं, ने सिरे से इन कानूनों को खारिज कर संघर्ष शुरू किया है। किसानों के संघर्ष में 32 जगह रेलवे ट्रैकों को रोका गया था।

ऐसे में मालगाड़ियों के बंद होने से राज्य में आने वाला कोयला व खादों की सप्लाई रुक जाने से पंजाब के मुख्यमंत्री ने किसानों को रेलवे ट्रैक खाली करने की बार-बार अपीलें कीं, तो किसानों ने पहले रेलवे ट्रैक खाली कर 5 नवंबर तक मालगाड़ियों को चलाने की छूट देकर वे प्लेटफार्म पर डट गए थे। इस पर केंद्र सरकार ने रेलवे मुलाजिमों की सुरक्षा पर सवाल उठाते मालगाड़ियों का ऑप्रेशन बंद रखने का फैसला ले लिया।

इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुरक्षा का जिम्मा लेते हुए किसानों को धरना ट्रैक से दूर ले जाने को मना लिया। इस पर शुक्रवार को मोगा में किसानों ने अपना धरना रेलवे ट्रैक से 50 मीटर दूर पार्क में शिफ्ट कर लिया और रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस प्लेटफार्म पर गश्त करने लग गई, परंतु अब केंद्र की धरनों को एक किलोमीटर दूर करने की शर्त को किसानों ने मानने से इनकार कर दिया है। अब वे लंबी लड़ाई लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।

जिले में 7 जगह चल रहे धरने जिले में किसानों के सातों धरने ही चल रहे हैं

इनमें मोगा-कोटकपूरा रोड पर रिलायंस पेट्रोल पंप वाला धरना बाघापुराना में तथा निहाल सिंह वाला में पंप पर चलने वाला धरना बाघापुराना में भाजपा नेता के घर के बाहर शिफ्ट हो गया है, जबकि रेलवे स्टेशन वाला धरना बाहर पार्क में शिफ्ट हुआ है। इसके अलावा मोगा में भाजपा जिला प्रधान के घर के बाहर व 2 टोल प्लाजाें पर धरने पहले की तरह जारी हैं।

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