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बापौली17 घंटे पहले
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बापौली. तामशाबाद यमुना बांध के पास प्रदर्शन करते किसान।
- किसानाें ने कहा- जल्द मुआवजा नहीं मिला ताे सरकार के खिलाफ देंगे धरना
पानीपत-बिजनौर 6 लाइन बन रहे नेशनल हाईवे में आई तामशाबाद के किसानों की जमीन का मुआवजा न मिलने से आक्रोशित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ बैठक का आयोजन किया और प्रदर्शन कर रोष जताया। चेतावनी दी कि अगर जल्द उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिला तो वाे हाईवे का निर्माण कार्य नहीं चलने देंगे और सरकार के खिलाफ धरना देने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
किसान कृष्ण, नूरहसन, नरेश शर्मा, रणधीर, जिलेंसिहं, रणजीत, जगपाल, सुखबीर, गीनू आदि ने बताया कि पानीपत जीटी रोड सिवाह के पास से बिजनौर तक 6 लेन हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसके लिए सरकार की और से जमीनों को अधिग्रहण किया है। उनकी जमीन का हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहण तो कर लिया गया लेकिन उन्हें मुआवजे का एक रुपया भी नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि डीसी, एसडीएम, तहसीलदार, डीआरओ, कानूनगों व पटवारी आदि को पत्र सौंपकर न्याय की गुहार भी लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
1880 से उनके पूर्वज कर रहे थे जमीन पर काश्त
किसानों ने बताया कि गांव की हिस्सेदारी की शामलात देह की जमीन पर उनके पूर्वज 1880 से काश्त कर रहे हैं। जमीन उनकी हिस्सेदारी का रकबा है। जोकि यमुना की धारा बदलने के कारणा यूपी व हरियाणा की और आता जाता रहता था। उनके पूर्वजों के समय से ही वो उक्त जमीन पर काबिज है। लेकिन सरकार ने इस्तेमाल के दौरान भी उक्त जमीन पर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रदेश के हर मुख्यमंत्री से वो उक्त जमीन को मलकियत बनाने की मांग भी कर चुके है।
उनके नाम लगे हुए हैं ट्यूबवेल
ग्रामीणों ने बताया कि 1972-74 में किलाबंदी की गई थी, उन्हें किला नंबर दिए गए थे। जिन पर वो आज भी काबिज हैं। उक्त जमीन की गिरदावरी व जमाबंदी भी उनके नाम पर ही है। इतना ही नहीं बल्कि उनके उक्त खेतों में लगे बिजली के ट्यूबवेल व बिजली कनेक्शन भी उनके नाम पर ही है। लेकिन इसके बावजूद भी उनकी जमीन का मुआवजा उन्हें नही दिया जा रहा है।
जमीन किसानों के नाम नहीं है, सरकार के नाम है। एनएचएआई ने डीआरओ को मुआवजे की राशि दे दी है। लेकिन उसके पास वितरित करने का अधिकार नहीं था। मैंने उसे कोर्ट में जमा करा दिया है। संजीव कुमार, इंजीनियर पानीपत-बिजनौर हाईवे बना रही कंपनी।
मामला डीआरओ के अधीन है और वो ही इसके बारे में जानकारी दे सकते हैं। उनके कहने पर वो किसानों को समझाने के लिए गए थे। नरेश कौशल, नायब तहसीलदार बापौली।
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