हजार बार हुए असफल, फिर भी बनाई अलग पहचान

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जो लोग आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं, उनके लिए सफलता और असफल का ही एक रूप है, जो सभी के जीवन में आता है. बस हमें इसका सामना करने के लिए पहले से तैयार रहने की जरूरत है. ऐसे ही कई बार फेल होने वाले इस बड़े डॉक्टर के सफलता की कहानी बड़ी रोचक है. जिला चिकित्सालय बलिया में कार्यरत डॉक्टर रितेश सोनी की गिनती कमजोर छात्र के रूप में स्कूल में होती थी. लेकिन इंटरमीडिएट के बाद कुछ ऐसा हुआ कि डॉ. सोनी ने इतिहास रच दिया.

जिला अस्पताल बलिया के डॉ. रितेश सोनी ने लोकल 18 को बताया कि मैं पढ़ने में बहुत कमजोर था और किसी तरह से हाई स्कूल पास किया. जब मैं इंटरमीडिएट में गया, तो वहां मुझे जीव विज्ञान (Biology) का विषय मिला. इस विषय को पढ़ने में अच्छा लगता था. किस्मत से मुझे इसमें सफलता मिली और यहीं से मनोबल बढ़ा. फिर धीरे-धीरे मैंने सफलता के रास्ते पर चलना शुरू कर दिया.

जीवन में बार-बार हुआ असफल
डॉ. रितेश सोनी ने Local 18 को आगे बताया कि मैं बलिया जिले के नरही गांव का रहने वाला हूं. मेरे पिता का नाम राजेश सोनी है. पहले मुझे पढ़ना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए पढ़ाई में मन भी नहीं लगता था. विद्यालय के तरफ से एक महीना स्पेशल क्लास हम लोगों को दिया गया, फिर भी मैंने हाई स्कूल 59 प्रतिशत से पास किया. मैंने इंटरमीडिएट में बायोलॉजी विषय चयन किया. यह विषय मेरा पसंदीदा था. इस कारण पढ़ने में मन लगने लगा और इंटरमीडिएट में मेरा परसेंटेज अचानक 70 प्रतिशत चला गया.

फेल होने वाले लड़के को ऐसे मिल गई सफलता
उन्होंने बताया कि उसके बाद हर तरफ मेरी तारीफ होने लगी, तो कहीं न कहीं यहीं से मेरा मनोबल मजबूत हुआ और मुझे पढ़ाई करने के लिए अन्य जिले में भेज दिया गया. फिर हर परीक्षा में मैं टॉप करने लगा. मैंने एनएमसीएच (NMCH) बिहार से सन 2016 में एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई की. उसके बाद सन 2018 में एम्स में जूनियर रेजिडेंसी के रूप में काम किया. आखिर में भर्ती आई, जिसमें बाकायदा मेरा इंटरव्यू लिया गया और मुझे बलिया जिला अस्पताल मिल गया. यहां आज मैं फिजिशियन के रूप में चार सालों से कार्यरत हूं.

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