पहले की 9000 में की नौकरी, फिर कारपेंटर का बेटा चलाने लगा 25 करोड़ की कंपनी

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कारपेंटर : अगर करियर के शुरूआती दिनों में ही किसी पर फेलियर का ठप्पा लग जाए तो वह इंसान हिम्मत हार जाता है. इन दिनों एक अच्छी नौकरी पाना टेढ़ी खीर है और कई लोग कम सैलरी के वजह से हताश-निराश हो जाते हैं और अपनी काबिलियत पर ही शक करने लगते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सभी कठिनाइयों से जूझते हुए सफलता को हासिल करते हैं. पिज़्जा गैलेरिया के फाउंडर संदीप जांगड़ा की जिन्होंने अपनी एक बिज़नेस आईडिया से अपने फेलियर को सक्सेस में बदल दिया.

हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना कस्बे से आने वाले संदीप जांगड़ा आज करोड़ों के टर्नओवर वाली पिज़्जा कंपनी चला रहे हैं. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर उनके लिए आसान नहीं था. जिंदगी में बार बार फेलियर का सामने वाले संदीप जांगड़ा ने कैसे चखा सफलता का स्वाद. आइए जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी…

कम उम्र में फैक्ट्री में किया काम
पिज़्जा गैलेरिया के फाउंडर संदीप जांगड़ा एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता कारपेंटर थे जो चार पाई बनाने का काम करते थे. पिता की कमाई से घर की कुछ जरूरतें पूरी हो जाती थी, लेकिन गुजारे के लिए यह काफी नहीं था. संदीप बताते हैं कि परिवार का हाथ बटाने के लिए बेहद कम उम्र में उन्होंने फैक्टरी में काम करना शुरू कर दिया था. इसकी जानकारी उनके परिवारवालों को नहीं थी.

करियर में लगा फेलियर का ठप्पा
अपने दोस्तों को देखते हुए संदीप ने 2009 में इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था. हालांकि, उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था जिस वजह से वह परीक्षा में बार-बार फेल होते थे. इस तरह 4 साल की डिग्री उन्होंने 6-7 साल में पूरी की. कॉलेज से निकलने के बाद उन्होंने गुरुग्राम में एक कंपनी में नौकरी मिली जहां उन्हें 9000 रुपये की सैलरी मिलती थी. हालांकि, दो साल तक काम करने के बाद भी उनकी सैलरी उतनी ही थी. वह जितना कमाते थे उतना खर्च हो जाता था. इससे हताश होकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और घर चले गए. संदीप ने घर वालों को नहीं बताया था कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी है, इस वजह से उन्हें पिता से डांट भी खानी पड़ी थी.

ऐसे खड़ी की 25 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनी
संदीप के पिता ने उन्हें अपने दुकान के बगल में ही एक नया कारपेंटर का दुकान खोलने की सलाह दी थी, लेकिन उनका नाम तो कुछ और ही करने का था. संदीप कहते हैं कि साल 2015 में गुरुग्राम में रहते हुए उन्होंने जिंदगी में पहली बार पिज्जा खाया था. पिज्जा खाते ही उन्हें ख्याल आया कि यह कितना स्वादिष्ट है और इसे सब्जियों के साथ कितने बेहतर तरीके से बनाया गया है. बस यहीं से उन्हें गोहाना के छोटे से कसबे से पिज्जा स्टोर को शुरू करने का आईडिया आया. हालांकि, पिज्ज़ा बनाने के लिए उन्होंने पहले ट्रेनिंग भी ली और कुछ महीने पिज्ज़ा बनाने का काम भी किया. ट्रेनिंग लेने में संदीप की मां ने पूरी मदद की और अपने गहने बेचकर उनके लिए पैसों का जुगाड़ किया.

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