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जालंधर2 घंटे पहले
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- 500 से ज्यादा कंटेनरों में फुटवियर, गर्म कपड़े, इंटीरियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चा माल फंसा
फेस्टीवल सीजन में ग्राहक नई वैरायटी न मिलने से परेशान हैं तो दुकानदार ट्रेनें बंद होने के कारण नया स्टॉक न पहुंच पाने से परेशान हैं। जालंधर के बाजारों में बिकने के लिए आने वाले करीब 500 कंटेनर बीच रास्ते में ही अटके हैं। जिन लोगों ने दिल्ली के व्यापारियों को ऑर्डर नोट कराए थे, वह इन्हें या तो रद्द करा रहे हैं या फिर जो माल खरीदा है, उसे पंजाब लाने की बजाय दूसरी जगहों पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। जालंधर के बाजार में करीब 250 करोड़ की बिक्री प्रभावित हुई है। दीपावली को 9 दिन बचे हैं लेकिन बाजार में दुकानदार निराश हैं। कारोबारी बताते हैं कि यात्री और गुड्स ट्रेन मिलाकर 2225 रूट बंद हैं। जालंधर में हर महीने करीब 100 कंटेनर माल विदेशों से आता है। दीपावली से पहले करीब 300 कंटेनर फिनिश्ड गुड्स के थे जबकि 200 कंटेनर इंडस्ट्रीयल इस्तेमाल के थे। सिटी की 40 हजार से अधिक दुकानें मुख्य तौर पर आयातित सामान पर निर्भर है।
फुटवियर मार्केट… सुरजीत सिंह मनचंदा बताते हैं कि दीपावली से पहले का 1 महीना पहले जो बिक्री होती हैं, वह पूरे साल के बराबर होती है। सीधे तौर पर 30 करोड़ की बिक्री नहीं हो सकी। फुटवियर विक्रेता कमल कहते हैं – फुटवियर निर्माण के लिए जालंधर का मॉडल हाउस हब है। यहां आज काम आधा रह गया है।
फैशन पहनें बाजार ।।.पुराने व्यापारियों में शामिल सुखविंदर सिंह बग्गा कहते हैं – ट्रेनें बंद होने के चलते बाहर का न आने से सारी उम्मीद धरी रह गई। गर्म कपड़ों का बाजार खासा प्रभावित हुआ। करोड़ों का माल जो बिक नहीं सका है, वो डंप हो जाएगा। अब इसकी बिक्री अगले साल पर निर्भर करेगी।
इंटीरियर और गिफ्ट्स…सजावट के सामान की बिक्री करने करने वाले विकास कहते हैं – हमारी बिक्री टिकी ही इस बात पर है कि हम अपने काउंटर पर दूसरों से अलग प्रोडक्ट रखें। दिल्ली के रास्ते विदेशों से ये माल आता है, जिसमें चीन और ताइवान का कब्जा है। फेस्टीवल सीजन से दो महीने पहले पूरी हलचल होती है, लेकिन इस बार 50 फीसदी काम प्रभावित है। ट्रेनें बंद होने पर दिल्ली से ट्रकों से माल आया, जिसमें देरी हुई।
इंडस्ट्री…इंडस्ट्री का एक्सपोर्ट व इंपोर्ट का करीब 2500 करो़ड़ का सामान अटका है कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के जालंधर कौंसिल के पदाधिकारी तुशार जैन कहते हैं कि पंजाब रीजन के 3500 कंटेनर विभिन्न जगहों पर अटके हैं। दूसरा नुकसान ये हुआ कि जो सामान जालंधर की इंडस्ट्री में दूसरे देशों व भारत के बाकी मार्केट के लिए तैयार होता है, वह तैयार होकर अटका है।
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