City air worsens, air quality index crosses 175, difficulty in breathing, case on 412 farmers | शहर की हवा खराब, एयर क्वालिटी इंडेक्स 175 पार, सांस लेने में दिक्कत, 412 किसानों पर केस

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जालंधर11 घंटे पहले

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  • सीजन में 1201 जगह जलाई गई पराली, वाहनों का धुआं और धूल भी जानलेवा
  • पिछली बार के मुकाबले 400 मामले ज्यादा

(अनुभव अवस्थी)
फेस्टिवल सीजन शुरू होते ही शहर की हवा प्रदूषित होने लगी है। जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी पराली के 1201 मामले सामने आ चुके हैं, जोकि पिछले साल के मुकाबले 400 ज्यादा हैं। यह हाल तब है, जब निगरानी के लिए 554 गांवों में नोडल अधिकारियों के साथ ग्राम समितियों को लगाया गया है। पराली से होने वाले नुकसान बताने के लिए वैन चलाई जा रही है।

इसके बावजूद शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 175 को पार कर चुका है, जबकि सामान्य दिनों में सिटी का एक्यूआई 80 से 90 के बीच होता है। प्रदूषण में वाहनों का धुआं और धूल भी बड़ा कारण है। अगर ऐसे ही शहर की हवा खराब होती रही तो दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं काेरोनाकाल में बुजुर्गों और बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। जिलेभर में सेटेलाइट के रिमोट सेंसिंग सेंटर से पराली जलाने की जानकारी ली जाती है। जहां कहीं भी पराली जलने की सूचना मिलती है, जिला प्रशासन की तैनात की गई टीम वहां जाती है और पूरा जायजा लेती है।

पराली जलाने के 412 मामलों में 9.25 लाख रुपए जुर्माना और 38 खेतों की रेड एंट्री

जिले में 30 सितंबर से 6 नवंबर तक पराली से संबंधित 1201 मामले आ चुके हैं, जिनमें नोडल अधिकारियों ने 768 जगहों का जायजा लिया। इनमें से अब तक 412 मामलों में रिपोर्ट दर्जकर इनसे 9,25,000 रुपए जुर्माना वसूला गया है।

इसके अलावा 38 खेतों को रेड एंट्री की गई है। वहीं यदि इसी दौरान बीते साल की बात करें तो 800 से अधिक मामले प्रशासन के पास आए थे, जिनमें 469 मामलों में प्रशासन के द्वारा कार्रवाई की गई थी। इनमें 4.90 लाख का जुर्माना लगाया गया था, हालांकि इस बार पिछले साल की अपेक्षा पराली के मामले अधिक सामने आए हैं, जबकि केस कम हुए। इसकी वजह जिला प्रशासन की ओर से पराली जलाने वालों पर सख्ती बताई जा रही है। डीसी घनश्याम थोरी ने कहा कि शिकायत मिलने पर टीम भेजी जाती है। फेस्टिवल सीजन में पराली जलाने के केस ज्यादा आते हैं। इसके चलते नोडल अधिकारियों को विशेष निगरानी में लगाया गया है।

नोडल अधिकारी करते हैं रेस्क्यू

मुख्य कृषि अधिकारी डाॅ. सुरिंदर सिंह ने बताया कि गांव के यूथ क्लबों की पहलकदमी से जहां पराली की उचित देखभाल की जा रही है, वहीं नौजवानों के लिए रोजगार के मौके भी पैदा किए जा रहे हैं। क्लबों ने धान की कटाई में 60 प्रतिशत फसलों के अवशेष का उचित प्रबंध की योजना बनाई गई है।

जिले की अलग-अलग यूथ क्लबों ने इससे प्रेरित होकर इस मार्ग को अपनाया है। कृषि विभाग की तरफ से किसानों को खेती के लिए 750 किटें वितरित करने की योजना बनाई गई है। जिले की 189 सहकारी सभाओं के पास पराली प्रबंधन मशीनें हैं। सोसायटियों को सरकार 80 फीसदी सब्सिडी वाली मशीनें मुहैया करवा रही हैं। दो वर्षों से 150 एकड़ क्षेत्रफल में पराली प्रबंधन को यकीनी बनाया है। अभी तक 13 पंचायतों को 20.41 लाख रुपए की मशीनें 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी गई हैं।

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