Changes in the movement of 4 planets in October may start a good time for some people | अक्टूबर में 4 ग्रहों की चाल में बदलाव होने से कुछ लोगों के लिए शुरू हो सकता है अच्छा समय

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एक महीने पहले

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  • अक्टूबर में सूर्य, मंगल और शुक्र राशि बदलेंगे, इनके साथ ही बुध ग्रह की चाल हो जाएगी वक्री

अक्टूबर में सूर्य, मंगल और शुक्र राशि बदलेंगे। इनके अलावा बुध टेढ़ी चाल से चलेगा। इन 4 ग्रहों के साथ ही पिछले महीने हुए शनि और बृहस्पति की चाल में बदलाव का असर 12 राशियों पर होगा। वहीं, राहु-केतु के राशि परिवर्तन का प्रभाव भी हर राशि पर होगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि अक्टूबर में इन 9 ग्रहों के कारण कुछ लोगों की जॉब और बिजनेस में बड़े बदलाव हो सकते हैं। वहीं कुछ लोगों के जीवन में अनचाही घटनाएं भी हो सकती हैं। सूर्य, मंगल और शनि की वजह से कुछ लोगों के कामकाज में रुकावटें और स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे। वहीं, बृहस्पति के प्रभाव से महत्वपूर्ण काम पूरे हो सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य पं. मिश्र के अनुसार सभी राशियों पर ग्रह-स्थिति का असर

सूर्य: सूर्य ग्रह का असर शरीर में पेट, आंखें, दिल, चेहरे और हड्डियों पर होता है। सूर्य के अशुभ प्रभाव से सिरदर्द, बुखार और दिल की बीमारियां होती हैं। इसके शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है। सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। इस ग्रह के प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की भी मिलती है।

सूर्य 30 दिन तक एक ही राशि में रहता है। हर साल अक्टूबर में ये ग्रह कन्या और तुला राशि में रहता है।

सूर्य 30 दिन तक एक ही राशि में रहता है। हर साल अक्टूबर में ये ग्रह कन्या और तुला राशि में रहता है।

मंगल: मंगल का असर शारीरिक ऊर्जा, ब्लड प्रेशर, स्वभाव में उत्साह, वीरता और गुस्सा, प्रॉपर्टी, व्हीकल, भाई, दोस्त, धातुओं में तांबे और सोने पर होता है। अगर मंगल का शुभ प्रभाव हो तो इन मामलों से जुड़ी परेशानियां होती है। वहीं शुभ प्रभाव से फायदा मिलता है।

ये ग्रह एक राशि में 45 दिन तक रहता है। इसके बाद अगली राशि में जाता है।

ये ग्रह एक राशि में 45 दिन तक रहता है। इसके बाद अगली राशि में जाता है।

बुध: बुध ग्रह के शुभ प्रभाव से शिक्षा, गणित, लेन-देन, निवेश और बिजनेस में फायदा मिलता है। इसके प्रभाव से फायदेमंद योजनाएं बनती हैं। इसके साथ ही शरीर में बुध का असर स्किन और आवाज पर पड़ता है। बुध के शुभ प्रभाव से इंसान चतुर बनता है। बुध के अशुभ प्रभाव से इन्हीं मामलों में नुकसान होता है।

हर 21 दिन में ये ग्रह राशि बदलता है। इसलिए सूर्य के साथ या उसके एक राशि आगे-पीछे ये ग्रह रहता है।

हर 21 दिन में ये ग्रह राशि बदलता है। इसलिए सूर्य के साथ या उसके एक राशि आगे-पीछे ये ग्रह रहता है।

गुरु: ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को सेहत, मोटापा, चर्बी और ज्ञान का कारक ग्रह माना जाता है। इसका प्रभाव शिक्षक, बड़े भाई, कीमती रत्न और धार्मिक जगहों पर होता है। इस ग्रह का शुभ-अशुभ प्रभाव नौकरी और बिजनेस पर भी पड़ता है।

आकार में बड़ा और पृथ्वी से ज्यादा दूरी पर होने के से ये ग्रह करीब 12 महीने में एक राशि बदलता है।

आकार में बड़ा और पृथ्वी से ज्यादा दूरी पर होने के से ये ग्रह करीब 12 महीने में एक राशि बदलता है।

शुक्र: शुक्र ग्रह का प्रभाव इनकम, खर्चा, शारीरिक सुख-सुविधाएं, शौक और भोग-विलास पर होता है। इस ग्रह के कारण विवाह, पत्नी, अपोजिट जेंडर और यौन सुख संबंधी मामलों में शुभ-अशुभ बदलाव देखने को मिलते हैं। शरीर में शुक्र का प्रभाव प्राइवेट पार्ट्स पर पड़ता है। इसके अशुभ प्रभाव से खांसी और कमर के निचले हिस्सों में बीमारी होती है।

शुक्र 27 दिन तक एक ही राशि में रहता है। फिर अगली राशि में जाता है। ये ग्रह भी अमूमन सूर्य के आसपास वाली राशि में ही रहता है।

शुक्र 27 दिन तक एक ही राशि में रहता है। फिर अगली राशि में जाता है। ये ग्रह भी अमूमन सूर्य के आसपास वाली राशि में ही रहता है।

शनि: शनि के शुभ प्रभाव से न्याय मिलता है। नौकरी और बिजनेस में तरक्की मिलती है। कर्जा खत्म होता है। विवादों में जीत मिलती है और उम्र बढ़ती है। इसके साथ ही हड्डी और पैरों से जुड़ी शारीरिक परेशानी भी खत्म होती है। शनि के अशुभ प्रभाव से दुख बढ़ता है। दुश्मन परेशानी करते हैं। सेहत खराब होती है। कामकाज में रुकावटें आने लगती हैं। सामान चोरी हो जाता है। दुर्घटनाएं होती हैं और हड्डी के चोट लगती है। कानूनी मामले भी उलझने लगते हैं।

धीमी गति से चलने की वजह से शनि एक राशि में ढाई साल तक रहता है। इन दिनों में ये ग्रह कुछ महीनों तक वक्री यानि टेढ़ी चाल से चलता है।

धीमी गति से चलने की वजह से शनि एक राशि में ढाई साल तक रहता है। इन दिनों में ये ग्रह कुछ महीनों तक वक्री यानि टेढ़ी चाल से चलता है।

राहु: राहु के शुभ प्रभाव से नौकरी और बिजनेस में किस्मत का साथ मिलता है। मनचाहा ट्रांसफर मिलता है। योजनाएं सफल होती हैं। कंफ्यूजन दूर होता है। राजनीति और जरूरी कामों में किस्मत का साथ मिलता है। इसके अशुभ प्रभाव से दिमागी उलझनें बढ़ती हैं। इंसान धोखे और झूठ का सहारा लेता है। अधर्मी हो जाता है। कूटनीति का शिकार होता है। नशा और चोरी करने लगता है। शारीरिक परेशानियां बढ़ती हैं।

राहु करीब 12 महीने तक एक राशि में रहता है। ये ग्रह उल्टा ही चलता है। यानी एक राशि पीछे चलता है।

राहु करीब 12 महीने तक एक राशि में रहता है। ये ग्रह उल्टा ही चलता है। यानी एक राशि पीछे चलता है।

केतु: केतु के शुभ प्रभाव से नौकरी और बिजनेस में योजनाएं पूरी होती हैं। हर तरफ से मदद मिलती है। इंसान धर्म और आध्यात्म की झुकता है। इस ग्रह से पैर मजबूत होते हैं और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। केतु के अशुभ प्रभाव के कारण विवाद बढ़ते हैं। लगातार डर बना रहता है। पैर, कान, रीढ़ की हड्डी, घुटने, जोड़ों के दर्द और किडनी संबंधी बीमारियां होती है। जहरीले जीव और जंगली जानवरों से नुकसान होता है।

केतु भी राहु की तरह उल्टी चाल से चलता है। ये राहु के साथ ही राशि बदलता है और हमेशा राहु के सामने वाली राशि में रहता है।

केतु भी राहु की तरह उल्टी चाल से चलता है। ये राहु के साथ ही राशि बदलता है और हमेशा राहु के सामने वाली राशि में रहता है।

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