कौन सी उम्र में Cervical Cancer का रिस्क ज्यादा? जानिए डॉ. मीरा पाठक

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Cervical Cancer Dr Meera Pathak

40 से 50 साल के बीच की महिलाएं Cervical Cancer का सबसे ज्यादा शिकार

कौन सी उम्र में Cervical Cancer का रिस्क ज्यादा? जानिए डॉ. मीरा पाठक से नई दिल्ली, 18 जनवरी । Cervical Cancer महिलाओं में होने वाला एक ऐसा कैंसर है, जिसे समय रहते पहचानकर और सही तरीके से रोकथाम करके आसानी से रोका जा सकता है। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक के मुताबिक, इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है यह जानना कि कौन सी उम्र में इस कैंसर का रिस्क सबसे ज्यादा होता है ताकि सही टेस्ट और उपचार से इसे रोका जा सके।

डॉ. मीरा पाठक बताती हैं किCervical Cancer आमतौर पर 35 से 55 साल की उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, 40 से 50 साल के बीच की महिलाएं इसका सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। अगर इस उम्र में किसी महिला को संबंध के बाद ब्लीडिंग (पोस्ट कॉइटल ब्लीडिंग) या संबंध के दौरान दर्द (पोस्ट कॉइटल पेन) जैसी शिकायत होती है, तो यह Survical Cancer के सबसे कॉमन लक्षण माने जाते हैं।

यही वजह है कि महिलाओं को इस उम्र में खुद के शरीर पर खास ध्यान देना चाहिए। डॉ. पाठक कहती हैं कि Cervical Cancer को आसानी से रोका जा सकता है। इसके लिए समय रहते स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन जरूरी है। इसके दो मुख्य तरीके हैं- पहला पैप स्मीयर टेस्ट और दूसरा एचपीवी वैक्सीन। पैप स्मीयर टेस्ट हर उस महिला को करना चाहिए जो सेक्सुअली एक्टिव हो चुकी है। इस टेस्ट में सैंपल माउथ ऑफ सर्विक्स से लिया जाता है।

यह टेस्ट हर तीन साल में किया जाना चाहिए। यदि 65 साल तक लगातार पैप स्मीयर नॉर्मल आता रहे, तो उसके बाद यह टेस्ट बंद किया जा सकता है। दूसरा तरीका है एचपीवी डीएनए टेस्टिंग, जो यह पता लगाने में मदद करता है कि महिला को ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) का इन्फेक्शन तो नहीं है। एचपीवी वायरस ही Cervical Cancer का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इस टेस्ट को भी माउथ ऑफ सर्विक्स से सैंपल लेकर किया जाता है।

अगर 30 साल की उम्र से यह टेस्ट शुरू किया जाए तो हर पांच साल पर दोबारा टेस्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट के साथ पैप स्मीयर भी कराई जा सकती है। इसके अलावा, एचपीवी वैक्सीन भी Cervical Cancer से बचाव में बहुत मददगार है। वैक्सीन को यौन गतिविधि शुरू होने से पहले लगवाना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

डॉ. पाठक कहती हैं कि यह जरूरी है कि महिलाएं खुद को इन लक्षणों और स्क्रीनिंग के बारे में शिक्षित करें। शुरुआत में हल्की ब्लीडिंग या दर्द को हल्के में न लें। समय पर जांच और टेस्ट कराना ही इस कैंसर को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।

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