स्क्रीन के अलावा यह चीजे भी डालती है आंखों पर बुरा असर, जाने

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आज के जमाने में अधिकतर लोग स्मार्टफोन और लैपटॉप पर घंटों बिता रहे हैं. इसका असर आंखों पर बुरी तरह पड़ रहा है. स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा होने से आईसाइट कमजोर हो सकती है और आंखें ड्राई होने की समस्या भी हो सकती है. दुनियाभर में करोड़ों लोग ड्राई आई (Dry Eyes) की परेशानी से जूझ रहे हैं. जब हमारी आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बन पाते हैं, तब आंखों में ड्राइनेस बढ़ने लगती है. कई बार आंखों में आंसू तो बनते हैं, लेकिन जल्दी सूख जाते हैं, जिसके कारण आंखों में ड्राइनेस होने लगती है. आज डॉक्टर से जानेंगे कि आई ड्राइनेस की प्रमुख वजह क्या है और इस समस्या से किस तरह निजात मिल सकती है.

नई दिल्ली के सिरीफोर्ट स्थित विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि आंखों में ड्राइनेस होने पर लोगों को काफी परेशानी होने लगती है. वे चीजों पर अच्छी तरह फोकस नहीं कर पाते हैं और उन्हें ऐसा लगता है जैसे आंख में कोई बाहरी चीज गिर गई हो. कई बार ड्राइनेस की वजह से विजन भी ब्लर होने लगता है. ड्राई आई की समस्या सभी उम्र के लोगों में बेहद तेजी से बढ़ती जा रही है. ड्राई आई की मुख्य वजह अत्यधिक स्क्रीनिंग टाइमिंग को माना जाता है, लेकिन इसके अलावा भी कई फैक्टर इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.

डॉक्टर तुषार कहते हैं कि अत्यधिक स्क्रीन देखने के अलावा कॉन्टेक्ट लेंस यूज करने से आंखें ड्राई होने लगती हैं. इसके अलावा हॉर्मोन्स में फ्लक्चुएशन की वजह से यह समस्या हो सकती है. कई फिजिकल डिजीज जैसे- रूमेटॉइड आर्थराइटिस की वजह से भी ड्राई आई की समस्या हो सकती है. इसके अलावा जोग्रेन सिंड्रोम (Sjögren’s syndrome) की वजह से आंखों में ड्राइनेस हो सकती है. अगर आपकी आंखों में यह समस्या आ रही है, तो आंखों के डॉक्टर से मिलकर जांच करानी चाहिए. कई टेस्ट के जरिए आंखों के ड्राइनेस का स्तर चेक किया जा सकता है. इसके आधार पर लोगों का इलाज किया जाता है.

 

एक्सपर्ट की मानें तो जिन लोगों को ड्राई आंखों की हल्की समस्या होती है, उन्हें आर्टिफिशियल टियर ड्रॉप डालने की सलाह दी जाती है. माइल्ड सिचुएशन में लोगों को दिन में 3-4 बार ड्रॉप इस्तेमाल करना चाहिए. हालांकि आंखों की ड्राइनेस सीवियर हो, तो हर घंटे पर आई ड्रॉप्स डालने का सुझाव दिया जाता है. कई मरीजों को ड्रॉप के बजाय आर्टिफिशियल टियर जैल रिकमेंड किया जाता है. इसके अलावा लोगों को आंखों की इंफ्लेमेशन कम करने के ड्रॉप भी दिए जाते हैं. अगर किसी को ड्राई आई की समस्या हो, तो आई स्पेशलिस्ट से मिलकर जांच करानी चाहिए और उनके द्वारा दिए गए ड्रॉप्स इस्तेमाल करने चाहिए.

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