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चंडीगढ़/दिल्ली13 घंटे पहले

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जंतर मंतर पर धरने पर बैठे कैप्टन

  • राष्ट्रपति द्वारा मुलाकात का समय न दिए जाने से नाराज हैं
  • किसानों के धरने के साथ पंजाब में गहराता जा रहा है संकट
  • बिजली उत्पादन ठप, खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भी बाधित है

किसानों के मुद्दों पर पंजाब और केंद्र सरकार के बीच तनातनी का माहौल बना हुआ है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने विधायकों और मंत्रियों के साथ बुधवार को दिल्ली में धरना देने पहुंचे।

पहले राजघाट पर धरना दिया जाना था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनसे राजघाट पर धरना नहीं देने का अनुरोध किया, जिसे कैप्टन ने स्वीकार किया। इसके बाद जंतर मंतर पर धरना देने का फैसला किया गया।

दिल्ली पहुंचते ही कैप्टन अमरिंदर सिंह व अन्य नेता पहले राजघाट गए। वहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद जंतर-मंतर पर पहुंचकर धरना दिया।

क्यों मचा है घमासान

दरअसल, पंजाब में ब्लैक आउट का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि रेल मंत्रालय ने प्रदेश में मालगाड़ियों की आवाजाही पर 7 नवंबर तक रोक लगा दी है। ऐसे में बिजली का संकट बढ़ सकता है, क्योंकि कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि पंजाब सरकार रेलवे ट्रैक और मालगाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है तो मालगाड़ियों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।

जंतर मंतर की ओर कूच करते पंजाब के विधायक

जंतर मंतर की ओर कूच करते पंजाब के विधायक

केंद्र सरकार के रवैये से खफा हैं कैप्टन

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से प्रदेश में बढ़ते संकट की ओर ध्यान देने की अपील की थी। समस्या का समाधान करने के लिए पंजाब सीएम कार्यालय ने 21 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर मीटिंग का समय मांगा था। 29 अक्टूबर को ज्ञापन के जवाब में सीएमओ के मीटिंग के आग्रह को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि प्रांतीय संशोधन बिल अभी राज्यपाल के पास लंबित पड़े हैं।

इस रवैये से कैप्टन काफी नाराज हैं। प्रदेश के दो मंत्रियों ने भी रेलवे और वित्त मंत्रालयों से मालगाड़ियों के निलंबन व जीएसटी बकाया की अदायगी न होने के मामले में चर्चा को समय मांगा था, लेकिन उन्हें भी मंत्रियों ने समय नहीं दिया।



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