लोन : माना जाता है कि दुनिया में भारतीय घरों में सबसे ज्यादा सोना (Gold) है. भारतीय परिवारों के पास 27,000 टन सोना होने का अनुमान है. अब भारतीय इस सोने का इस्तेमाल लोन लेने में खूब कर रहे हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों ने 5300 टन यानि 53 लाख किलो सोना गिरवी रखकर वित्तीय संस्थानों से गोल्ड लोन (Gold Loan) लिया है. देश में गोल्ड लोन का बाजार करीब 15 लाख करोड़ रुपये का है और यह सालाना 17 फीसदी के दर से बढ रहा है. आरबीआई के नियमों के मुताबिक बैंक या फिर एनबीएफसी सोने की ज्वैलरी के कुल वैल्यू का 75 फीसदी तक गोल्ड लोन दे सकते हैं.
बैंकों के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ने सरकार और वित्त मंत्रालय की चिंता भी बढ़ा दी है. सरकार ने बैंकों की ओर से गोल्ड लोन देने में रेग्यूलेटरी नियमों के अनुपालन में उल्लंघन का मामला पाया है. हाल ही में वित्त मंत्रालय ने सभी सरकारी बैंकों को गोल्ड लोन पोर्टफोलियो के समीक्षा करने के आदेश दिए थे. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने एक जनवरी 2022 से लेकर 31 जनवरी 2024 तक के बीच दिए गए गोल्ड लोन को रिव्यू करने को कहा है.
कौन ले रहा है सबसे ज्यादा लोन
ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण इलाकों में गोल्ड लोन ज्यादा लिया जा रहा है. इसी तरह छोटे कारोबारी और व्यक्तिगत तौर पर लोग सोने को गिरवी रख ज्यादा लोन ले रहे हैं. देश में गोल्ड लोन मार्केट में संगठित क्षेत्र यानी एनबीएफसी और बैकों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम ही है. आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 15 लाख करोड़ रुपये के गोल्ड लोन के बाजार में उनकी हिस्सेदारी छह लाख करोड़ करोड़ की है. अभी भी साहूकारों और महाजनों का कब्जा 60 फीसदी या नौ लाख करोड़ रुपये के बाजार पर है.
बैंकों ने जमकर बांटा गोल्ड लोन
चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के अंत तक यानी 31 दिसंबर 2023 तक एसबीआई का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 30,881 करोड़ रुपये का रहा है. पंजाब नेशल बैंक का 5315 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा का 3682 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो है.


