होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली अंतिम लड़ाई ही तय करेगी कि इस युद्ध में कौन जीतेगा और कौन हारेगा
ईरान संघर्ष पर रे डालियो की बड़ी चेतावनी: होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी सबसे खतरनाक दौर आना बाकी Ray Dalio Iran conflict नई दिल्ली, 11 अप्रैल (TNT)। दुनिया के जाने-माने निवेशक और ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस टकराव का सबसे गंभीर और निर्णायक चरण अभी बाकी है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली अंतिम लड़ाई ही यह तय करेगी कि इस युद्ध में कौन जीतेगा और कौन हारेगा।
अमेरिकी अरबपति डालियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा
Ray Dalio Iran conflict अमेरिकी अरबपति डालियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस संघर्ष में शामिल सभी पक्ष जानते हैं कि असली और निर्णायक लड़ाई अभी नहीं लड़ी गई है। उनके अनुसार, यह ‘फाइनल बैटल’ ही युद्ध का परिणाम तय करेगी और इसका असर लंबे समय तक वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की संभावना को लगभग खारिज करते हुए कहा कि इस स्थिति में समझौते ‘बेकार’ साबित हो सकते हैं।
डालियो के मुताबिक, पूरे संघर्ष का केंद्र एक अहम सवाल पर टिका
Ray Dalio Iran conflictउन्होंने कहा है कि आगे आने वाला दौर इस संघर्ष का सबसे खतरनाक चरण हो सकता है। डालियो के मुताबिक, पूरे संघर्ष का केंद्र एक अहम सवाल पर टिका है—क्या अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित व्यापारिक आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ऐसा करने में विफल रहता है, तो इसे उसकी हार मानी जाएगी, भले ही ईरान को थोड़ी भी नियंत्रण शक्ति मिल जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इससे निवेश और पूंजी का रुख भी बदल सकता है
Ray Dalio Iran conflict इसमें खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नुकसान, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, सहयोगी देशों का भरोसा कम होना और डॉलर की वैश्विक स्थिति पर खतरा शामिल है। इससे निवेश और पूंजी का रुख भी बदल सकता है। पांच शताब्दियों के साम्राज्यवादी चक्रों के अपने अध्ययन के आधार पर, डालियो ने कहा कि अगर अमेरिका इस संकट को संभालने में विफल रहता है, तो यह स्थिति 1956 के स्वेज नहर संकट जैसी हो सकती है, जिसने ब्रिटेन की वैश्विक ताकत को कमजोर कर दिया था।
इसी तरह का पैटर्न 18वीं शताब्दी में डच साम्राज्य और 17वीं शताब्दी में स्पेनिश साम्राज्य के पतन के दौरान भी देखा गया
Ray Dalio Iran conflict उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह का पैटर्न 18वीं शताब्दी में डच साम्राज्य और 17वीं शताब्दी में स्पेनिश साम्राज्य के पतन के दौरान भी देखा गया था, जब किसी अहम व्यापारिक मार्ग पर नियंत्रण खोने से वैश्विक शक्ति संतुलन बदल गया। डालियो के मुताबिक, ईरान-होर्मुज संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ सकता है। —आईएएनएस डीबीपी


