गिन्नी वेड्स सनी 2′ से लौटेगा फैमिली एंटरटेनमेंट: अविनाश तिवारी Ginny Weds Sunny 2

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गिन्नी वेड्स सनी 2' से लौटेगा फैमिली एंटरटेनमेंट: अविनाश तिवारी Ginny Weds Sunny 2

बॉलीवुड एक्टर अविनाश तिवारी और मेधा शंकर अपनी आगामी फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ में शादी के माहौल में खूब धूम मचाने वाले हैं

‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ परिवारों को वापस सिनेमाघरों में लेकर आएगी : अविनाश तिवारी Ginny Weds Sunny 2 मुंबई, 9 अप्रैल (TNT)। बॉलीवुड एक्टर अविनाश तिवारी और मेधा शंकर अपनी आगामी फिल्म ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ में शादी के माहौल में खूब धूम मचाने वाले हैं। इस रोमांटिक कॉमेडी का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज किया गया, जिसमें रिश्तों से जुड़े भावनात्मक विषयों के साथ एक उतार-चढ़ाव भरी प्रेम कहानी दिखाई गई है। फिल्म दर्शकों को पारिवारिक माहौल में ले जाएगी, जहां परिवार, शादी, गलतफहमियों, हंसी-मजाक और चौंकाने वाले ट्विस्ट दर्शकों को हैरान कर देंगे।

अविनाश तिवारी और मेधा शंकर से सवाल पूछा गया कि शादियों में भारतीय परिवारों में किसे सबसे ज्यादा परेशानी होती है

Ginny Weds Sunny 2 शो का ट्रेलर लॉन्च भव्य तरीके से रखा गया, जहां अविनाश तिवारी और मेधा शंकर ने अपनी फिल्म और सिनेमा पर खुलकर बात की। अविनाश तिवारी और मेधा शंकर से सवाल पूछा गया कि शादियों में भारतीय परिवारों में किसे सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसका जवाब देते हुए मेधा शंकर कहती हैं, फूफाजी। वे कहती हैं, “मैंने अक्सर सुना है कि शादी में फूफाजी को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। उन्हें शादी का खाना अच्छा नहीं लगता है और सोने की अंगूठी भी गिफ्ट में नहीं मिलती है।

शादी में बवाल हमेशा घर की बड़ी बहन करती है

Ginny Weds Sunny 2 यही चीजें फूफाजी को नाराज करने के लिए काफी हैं, जबकि अविनाश तिवारी कहते हैं कि शादी में बवाल हमेशा घर की बड़ी बहन करती है। वो घर को संभालना भी जानती है और शादी में बवाल करने वाले लोगों को ठीक करना भी।” ‘गिन्नी वेड्स सनी 2’ से जुड़े सवाल पर अभिनेता ने कहा, “आज के समय में बहुत कम पारिवारिक फिल्में बन रही हैं और हमें उम्मीद है कि यह फिल्म परिवारों को वापस एक साथ सिनेमाघरों में लौटने के लिए मजबूर करेगी।Ginny Weds Sunny 2

आज के समय में एक्शन और फिक्शन फिल्में बनती हैं और पारिवारिक फिल्में कम

Ginny Weds Sunny 2 आज के समय में एक्शन और फिक्शन फिल्में बनती हैं और पारिवारिक फिल्में कम।” उन्होंने कहा, “मेरे ही घर के बच्चे मेरी फिल्में नहीं देखते हैं, क्योंकि उसमें एक्शन होता है और खून-खराबा भी। यही कारण है कि लोगों ने सोचना कम कर दिया है कि पहले की तरह फिल्में पारिवारिक भी बननी चाहिए। हर जॉनर अच्छा होता है, लेकिन परिवार और भावनाओं पर बनने वाली फिल्मों की संख्या कम हो गई। उम्मीद है कि हम सिनेमाघरों में वापस परिवारों को लाने में कामयाब होंगे। –-आईएएनएस पीएस/एबीएम

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