गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री पर सवाल: अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित देश को सदस्यता क्यों?”Pakistan Gaza Peace Board

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गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री पर सवाल: अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित देश को सदस्यता क्यों?"Pakistan Gaza Peace Board

पिछले दो वर्षों से अपने ही क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपनाने वाले देश की ‘शांतिदूत’ भूमिका निभाने की क्षमता सवालों के घेरे में

गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान: अल्पसंख्यकों के लिए ‘असुरक्षित’ देश को सदस्यता क्यों? पूछा जाने लगा सवाल Pakistan Gaza Peace Board नई दिल्ली, 22 मार्च (TNT)। पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जिन्हें ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) में जगह दी गई है। इसका गठन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में स्थायी शांति का समाधान खोजने के लिए किया है। हालांकि, धार्मिक उत्पीड़न और अपनी धरती पर आतंकवाद को पोषित करने का इसका रिकॉर्ड आड़े आ रहा है। पिछले दो वर्षों से अपने ही क्षेत्र में आक्रामक रवैया अपनाने वाले देश की ‘शांतिदूत’ भूमिका निभाने की क्षमता सवालों के घेरे में है।

ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंताजनक तस्वीर

Pakistan Gaza Peace Board गेटस्टोन इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ईसाइयों, हिंदुओं और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के खिलाफ हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे यह देश उनके लिए “सबसे खतरनाक जगहों” में शुमार होता जा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि बीता वर्ष अल्पसंख्यकों के लिए संकट और गहराने वाला रहा।

वैश्विक मानवाधिकार रिपोर्ट”

Pakistan Gaza Peace Board भीड़ द्वारा हिंसा (मॉब वायलेंस) के मामलों में बढ़ोतरी हुई और अपराधियों को सजा मिलने के बजाय “लगभग पूरी तरह से छूट” मिलती रही। खासकर ईसाई समुदाय पर ईशनिंदा (ब्लास्फेमी) के आरोप अक्सर अचानक भड़क उठते हैं और फिर सामूहिक सजा का रूप ले लेते हैं—जिसमें चर्च जलाना, घरों पर हमले और लोगों की आजीविका तबाह करना शामिल है। रिपोर्ट में जबरन धर्मांतरण, अपहरण और कम उम्र की हिंदू व ईसाई लड़कियों की जबरन शादी के मामलों को भी व्यापक बताया गया है।

Pakistan Gaza Peace Board पीड़ित परिवारों के पास कानूनी मदद के सीमित विकल्प होते हैं, जबकि उन्हें धमकियों और प्रशासनिक पक्षपात का भी सामना करना पड़ता है। एक उदाहरण में 21 वर्षीय ईसाई कृषक मार्कस मसीह की संदिग्ध मौत का जिक्र है, जिसे कथित तौर पर उसके नियोक्ताओं ने प्रताड़ित किया, हालांकि बाद में इसे आत्महत्या करार दिया गया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा।

Pakistan Gaza Peace Board इसके बाद, “अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग” (यूएससीआईआरएफ) ने अमेरिकी सरकार से पाकिस्तान को फिर से “कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” (सीपीसी) घोषित करने की सिफारिश की, जो धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में अन्य घटनाओं का भी उल्लेख है—मार्च 2025 में एक ईसाई युवक वकास मसीह की हत्या, मई 2025 में काशिफ मसीह की कथित यातना से मौत, और 2024 में वकास सलामत की मृत्यु जैसे मामले अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की गंभीरता को दर्शाते हैं।

Pakistan Gaza Peace Board इसके अलावा सिंध और पंजाब में 2025 के दौरान कई नाबालिग लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण के मामलों का भी जिक्र किया गया है। 12 वर्षीय साबा शफीक का मामला, जिसमें अपहरण के बाद धर्म परिवर्तन और शादी कर दी गई, खास तौर पर चिंताजनक बताया गया है। इसके निष्कर्ष में लिखा है—ऐसे हालात में पाकिस्तान को किसी भी “शांति बोर्ड” या वैश्विक शांति तंत्र में शामिल करना उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। —आईएएनएस केआर/

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