सख्त सवाल: ‘फ्रीबीज’ पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी—विकास के लिए पैसा कहां से आएगा?Supreme Court on Freebies

0
सख्त सवाल: ‘फ्रीबीज’ पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी—विकास के लिए पैसा कहां से आएगा?Supreme Court on Freebies
New Delhi: A general view of the Supreme Court of India standing tall under a clear sky, in New Delhi, Monday, January 05, 2025. (Photo: IANS/Deepak Kumar)

सरकारों को सिर्फ मुफ्त चीजें बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए

‘मुफ्त सुविधाएं देते रहेंगे, तो कहां से आएगा विकास के लिए पैसा?’, फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी Supreme Court on Freebies नई दिल्ली, 19 फरवरी (TNT)। मुफ्त सुविधाओं के वादों (फ्रीबीज) पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि सरकारों को सिर्फ मुफ्त चीजें बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इस तरह से फ्रीबीज बांटने पर देश का आर्थिक विकास रुकेगा।

कोर्ट की टिप्पणी रेवेन्यू घाटे के बावजूद राज्यों की ओर से मुफ्त योजनाएं

Supreme Court on Freebies फ्रीबीज के मामले में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। सीजेआई ने बढ़ते रेवेन्यू घाटे के बावजूद राज्यों की ओर से मुफ्त योजनाएं चलाए जाने पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कई राज्य सरकारें भारी कर्ज और घाटे के बावजूद मुफ्त योजनाएं बांट रही हैं। अगर सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रहेंगी, तो आखिर इनका खर्च कौन उठाएगा?

मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी, तो विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा?

Supreme Court on Freebies अगर सरकारें मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी, तो विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा?” सीजेआई ने कहा कि कई राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी वे नई-नई कल्याण योजनाएं शुरू कर रहे हैं। कोर्ट ने कैश ट्रांसफर व मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की वित्तीय समझदारी पर सवाल उठाया और कहा कि राज्यों को मदद बढ़ाने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई

Supreme Court on Freebies इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सरकार ने कुछ समुदायों के लिए बिजली टैरिफ में सब्सिडी स्कीम की घोषणा की थी। इससे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर फाइनेंशियल दबाव पड़ा। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि राज्य को रोजगार के रास्ते खोलने के लिए काम करना चाहिए।

कुछ लोग शिक्षा या सामान्य जिंदगी ठीक से नहीं जी सकते

Supreme Court on Freebies मुफ्त भोजन, मुफ्त साइकिल और मुफ्त बिजली से आगे हम एक ऐसे स्टेज पर पहुंच रहे हैं, जहां हम सीधे लोगों के खातों में कैश ट्रांसफर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सोचिए, ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे में हैं, लेकिन फिर भी सिर्फ इन पॉलिसी के लिए वे मजबूर हैं और फिर विकास के लिए पैसा नहीं है।” कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग शिक्षा या सामान्य जिंदगी ठीक से नहीं जी सकते हैं, तो उन्हें सुविधा देना राज्य का फर्ज है, लेकिन जो लोग मजे कर रहे हैं, फ्रीबीज पहले उनकी जेब में जा रहे हैं।

अदालत ने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले योजनाओं की घोषणा क्यों की जा रही है। सभी राजनीतिक दलों और समाजशास्त्रियों को फिर से सोचने की जरूरत है। यह कब तक चलेगा? Supreme Court on Freebies —आईएएनएस डीसीएच/एबीएम

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here