बॉलीवुड की अदाकारा बिपाशा बसु ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दी हैं, लेकिन 2010 में आई फिल्म ‘लम्हा’ का एक खास वाकया उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा। यह फिल्म केवल अपने कंटेंट के कारण नहीं, बल्कि इसके फिल्मांकन के दौरान कश्मीर में लगे कर्फ्यू के कारण भी चर्चित रही। हाल ही में, बिपाशा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पुराना इंटरव्यू साझा किया, जिसमें उन्होंने इस अनुभव के बारे में खुलकर बात की।

कश्मीर: एक खूबसूरत परिदृश्य
कश्मीर, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन जब बिपाशा बसु और फिल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया ने इस खूबसूरत स्थान पर शूटिंग करने का निर्णय लिया, तो वहां का माहौल एकदम विपरीत था। कर्फ्यू के दौरान शूटिंग करना न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि यह एक बड़ा जोखिम भी था।
राहुल ढोलकिया ने अपने अनुभव में बताया कि जब बिपाशा को कर्फ्यू की जानकारी मिली, तो वह बेहद नाराज हुईं। उन्होंने एक फोन कॉल के माध्यम से राहुल को अपनी नाराजगी व्यक्त की। बिपाशा ने कहा, “ओह, कश्मीर बहुत सुंदर है, मुझे यह पसंद है, वहां एक भी व्यक्ति नहीं दिख रहा है!” यह बयान उनके उस समय की निराशा को स्पष्ट करता है, जब उन्हें पता चला कि कर्फ्यू के कारण शूटिंग की जा रही है।
बिपाशा का गुस्सा
जब बिपाशा ने शूटिंग के लिए कर्फ्यू के दौरान वहां पहुंचने पर डायरेक्टर को फोन किया, तो उनका गुस्सा स्वाभाविक था। उन्होंने कहा, “क्या आप कृपया यहां आ सकते हैं? आपको मेरे साथ कर्फ्यू में शूटिंग करने की हिम्मत कैसे हुई?” यह कहना था कि उन्हें लगा कि यदि वह जानतीं कि स्थिति इतनी गंभीर है, तो वह वहां नहीं आतीं।
राहुल ने अपनी बात का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने बिपाशा को आश्वस्त करने की कोशिश की, “मैं जानता हूं कि यह सुरक्षित है क्योंकि कर्फ्यू लगा हुआ है।” लेकिन उनके इस आश्वासन से बिपाशा का गुस्सा कम नहीं हुआ।

फिल्म ‘लम्हा’ का सफर
‘लम्हा’ को 2010 में रिलीज किया गया था और इसमें संजय दत्त, बिपाशा बसु, कुणाल कपूर, और अनुपम खेर जैसे बड़े सितारे थे। फिल्म की कहानी एक भारतीय सेना अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कश्मीर में हो रहे हमलों के पीछे के जिम्मेदार व्यक्ति को खोजने के लिए गुप्त रूप से जाता है।
हालांकि, फिल्म की कहानी और इसकी कास्ट प्रभावशाली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। यह फिल्म न केवल कश्मीर के खूबसूरत दृश्यों को दिखाती है, बल्कि यह वहां की जटिल स्थिति और संघर्षों को भी उजागर करती है।
कश्मीर में फिल्मांकन की चुनौतियां
कश्मीर में फिल्मांकन करना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण काम रहा है। कभी प्राकृतिक आपदाओं, कभी राजनीतिक अशांति और कभी सुरक्षा कारणों से, वहां की शूटिंग के लिए विशेष सावधानियों की आवश्यकता होती है। कर्फ्यू के दौरान शूटिंग करना एक साहसिक कदम था, और इसने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कला की खातिर इतना बड़ा जोखिम उठाना सही है।
बिपाशा और राहुल के अनुभव ने इस बात को उजागर किया कि जब एक कलाकार किसी नए स्थान पर काम करने के लिए जाता है, तो उसे उस स्थान की सांस्कृतिक और सामाजिक स्थिति को समझना कितना जरूरी है। बिपाशा का गुस्सा इस बात को दर्शाता है कि बिना पूरी जानकारी के किसी भी स्थिति में कदम रखना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

बिपाशा बसु का करियर
बिपाशा बसु ने अपने करियर की शुरुआत 2001 में फिल्म ‘अजनबी’ से की थी, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। तब से वह कई सफल फिल्मों का हिस्सा रहीं और अपनी अदाकारी के लिए जानी गईं। उनके करियर में ‘लम्हा’ जैसे साहसी निर्णय उनके पेशेवर विकास का हिस्सा रहे हैं।
बिपाशा बसु की ‘लम्हा’ के दौरान कर्फ्यू में की गई शूटिंग केवल एक फिल्मांकन की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। यह हमें यह बताती है कि कला की दुनिया में सुरक्षा और कलात्मकता के बीच संतुलन बनाना कितना महत्वपूर्ण है।
इस अनुभव ने बिपाशा को एक नए दृष्टिकोण से देखा और उन्हें सिखाया कि किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी जानकारी और समझ होना आवश्यक है। आज, जब हम इस फिल्म के बारे में बात करते हैं, तो यह केवल एक असफल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक साहसी कोशिश की कहानी है जो हमें कश्मीर की खूबसूरती और जटिलता दोनों का एहसास कराती है।
बिपाशा बसु की यात्रा से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि चुनौतियों का सामना करते हुए हमें कभी भी अपनी कला और अपने मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।