शेयर बाजार में वॉलैटिलिटी बढ़ रही है इसलिए निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरुरत है. आपने अक्सर यह बात मार्केट एक्सपर्ट्स से सुनी होगी. लेकिन, क्या आप जानते हैं ये वॉलैटिलिटी क्या बला है. आखिर क्यों वॉलैटिलिटी बढ़ने पर बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं. अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या करने की इच्छा रखते हैं तो वॉलैटिलिटी के बारे में आपको जरूर जान लेना चाहिए. हर अनुभवी और स्मार्ट इन्वेस्टर बाजार में ट्रेड करने से पहले वॉलैटिलिटी पर ध्यान देता है. वॉलैटिलिटी जितनी ज्यादा होगी मार्केट में निवेश को लेकर जोखिम उतना ही बढ़ जाता है.
शेयर मार्केट में वॉलैटिलिटी का पता लगाने के लिए इंडिया विक्स (India Vix) इंडेक्स होता है. इसके जरिए वॉलैटिलिटी का पता लगाया जा सकता है. आइये अब आपको बताते हैं आखिर क्या होती है वॉलैटिलिटी और कैसे यह निवेशकों के सौदे को प्रभावित करती है.
क्या होती है वॉलैटिलिटी
शेयर बाजार में जब किसी स्टॉक की कीमत या इंडेक्स के लेवल में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है तो उसे वॉलैटिलिटी कहा जाता है. हिंदी में वॉलैटिलिटी को अस्थिरता से समझा जा सकता है. ऐसी स्थिति में बाजार अस्थिर रहता है क्योंकि शेयरों के भाव तेजी से बढ़ते और घटते हैं. आमतौर, हाई वोलैटाइल मार्केट में निवेश या ट्रेड नहीं करना चाहिए.
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटी हेड, अनुज गुप्ता के अनुसार, मार्केट वॉलैटाइल, उस स्थिति में होता है जब शेयर या इंडेक्स की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होने लगता है. वॉलैटिलिटी ना सिर्फ शेयर बाजार में बल्कि कमोडिटी मार्केट में भी होती है. अच्छी बात यह है कि वॉलैटाइल मार्केट में तेजी और मंदी दोनों करके पैसा कमाया जा सकता है. लेकिन, यह F&O ट्रे़डर के लिए ही अच्छा होता है.
F&O ट्रेडर के लिए वरदान और अभिशाप
मार्केट में जितनी वॉलैटिलिटी बढ़ती है उतना ही स्टॉक या इंडेक्स ऑप्शन का प्रीमियम घटता-बढ़ता है. चूंकि, फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग, हाई रिस्क और हाई रिवार्ड देने वाली होती है. ऐसे में वॉलैटिलिटी बढ़ने पर ऑप्शन की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होने से ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने का मौका मिलता है, लेकिन साथ में रिस्क भी उतना ही होता है इसलिए निवेशकों को हमेशा सलाह दी जाती है कि वॉलैटाइल मार्केट में ट्रेडिंग संभलकर करें.
कब बढ़ती है वॉलैटिलिटी, कैसे चेक करें
शेयर या कमोडिटी बाजार में वॉलैटिलिटी बढ़ने का एकमात्र कारण है महत्वपूर्ण इवेंट. जब भी कोई ऐसा ग्लोबल या घरेलू इवेंट होने वाला होता है जिसका बाजार पर असर पड़ सकता है तो मार्केट में असमंजस या अस्थिरता बढ़ जाती है. आमतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, आरबीआई की बैठक, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, युद्ध समेत कोई भी अप्रिय घटना जिससे मार्केट पर असर पड़ता है तो वॉलैटिलिटी बढ़ जाती है. आपने अक्सर देखा होगा कि आरबीआई या बजट में होने वाले ऐलान से पहले और बाद में शेयर बाजार में तेजी से उछाल और गिरावट आ जाती है.


