टाटा बिज़नस में शामिल था एक मिस्त्री का हिस्सा, पढ़े आर्टिकल

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टाटा की नींव जमशेदजी टाटा ने 1868 में रखी थी. इसका मुख्यालय मुंबई में है. यह एक फैमिली बिजनेस था. जिसके कंट्रोलिंग स्टेक्स आज भी टाटा संस के पास ही हैं. टाटा संस का औपचारिक गठन 1904 में हुआ जब दोराब और रतन टाटा (बेटे) व आरडी टाटा (कज़न) ने अपनी कंपनियों का विलय कर टाटा संस की स्थापना की. अब तक यह एक परिवार का ही बिजनेस था. लेकिन आगे इसमें चलकर एक और परिवार की एंट्री होने वाली थी. यह है शपूरजी पोलनजी मिस्त्री परिवार. साइरस मिस्त्री इसी परिवार के बेटे थे जो कुछ समय के लिए टाटा के प्रमुख बने थे. मिस्त्री परिवार के पास टाटा ग्रुप में 18.5 फीसदी हिस्सेदारी है.

लेकिन यह हुआ कैसे? यह जानने के लिए आपको एक और नाम जानना होगा. फ्रमरोज एडुलजी दिनशॉ. यह टाटा परिवार के करीबी थे. यह एक जंमीदार भी थे और इनके पास अच्छी-खासी संपत्ति थी. 1924-26 के बीच जब टाटा समूह पर संकट के बादल मंडरा रहे थे तब दिनशॉ ने 2 करोड़ रुपये देकर कंपनी को बचा लिया था. इस रकम के बदले टाटा स्टील के मुनाफे में उन्हें 25 परसेंट और टाटा हाइड्रो के मुनाफे में 12.5 परसेंट हिस्सेदारी देना तय हुआ. आगे चलकर जब टाटा स्टील और हाइड्रो एक होकर टाटा संस में बदल गई तो दिनशॉ का कर्ज यहां 12.5 हिस्सेदारी में तब्दील हो गया. यह साल 1930 की बात है.

शपूरजी पलोनजी मिस्त्री की एंट्री
1936 में दिनशॉ का देहांत हो गया. तब शपूरजी पलोनजी ने उनके परिवार से यह 12.5 परसेंट हिस्सेदारी खरीद ली. जमशेदजी टाटा के भाई आरडी टाटा (रतनजी दादाभाई टाटा) के बेटे जेआरडी टाटा थे. जेआरडी ने अपना हिस्सा अपने बच्चों सिला, दराब, जिम्मी और रोदाबेह में बराबर बांट दिया था. इनमें से सिला और दराब ने अपनी हिस्सेदारी शपूरजी पलोनजी ग्रुप को बेचकर टाटा संस में उनकी हिस्सेदारी 17.5 फीसदी पहुंचा दी. 1975 में शपूरजी पलोनजी के बेटे पलोनजी शपूरजी के हाथ में यह हिस्सेदारी आ गई. 1995 में टाटा समूह राइट्स इश्यू लाया और इसमें मिस्त्री परिवार ने अपनी हिस्सेदारी टाटा में 1 परसेंट और बढ़ाकर इसे 18.5 फीसदी कर दिया.

रतन टाटा और साइरस मिस्त्री
रतन टाटा के पिता का नाम नवल टाटा था. नवल को नवजबाई ने गोद लिया था. नवजबाई जमशेदजी टाटा के बेटे सर रतन टाटा की पत्नी थीं. नवल टाटा के 2 बेटे हुए रतन और नोएल टाटा. रतन टाटा ने 1991 टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला. 2012 में उनकी जगह साइरस मिस्त्री ने ले ली. वह पलोनजी शपूरजी के बड़े थे. हालांकि, विवादों के बाद 2016 में एकबार फिर रतन टाटा चेयरमैन बन गए. अब वह कंपनी का मानद चेयरमैन हैं जबकि चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन हैं. साइरस मिस्त्री की सितंबर 2022 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई.

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