शारीरिक गतिविधि के कम होने से शरीर में बहुत सारी बीमारियां पनपने लगती हैं
बवासीर के लिए काल है कचनार Kachnar Root for Piles के पेड़ की जड़, जान लें प्रयोग का सही तरीका नई दिल्ली, 29 जनवरी (TNT)। आज की जीवनशैली ऐसी है कि घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर काम करना पड़ता है, जिससे शारीरिक गतिविधि कम हो गई है। शारीरिक गतिविधि के कम होने से शरीर में बहुत सारी बीमारियां पनपने लगती हैं, और सबसे ज्यादा युवाओं से लेकर बुजुर्गों में बवासीर की परेशानी देखी जा रही है।
ऑपरेशन के बाद बवासीर के मस्से दोबारा नहीं होते
गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देता है, लेकिन कई बार ऑपरेशन के बाद दोबारा वही परेशानी होने लगती है, इसलिए इस बीमारी की जड़ पर काम करना जरूरी है। लोगों के बीच धारणा है कि ऑपरेशन के बाद बवासीर के मस्से दोबारा नहीं होते, लेकिन ऐसा नहीं है। ऑपरेशन के दौरान बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, बल्कि ऊपरी सतह से हटा दिया जाता है।Kachnar Root for Piles
ऐसे में आयुर्वेद में कचनार के पेड़ की छाल को बहुत उपयोगी बताया गया है। आयुर्वेद में कचनार को बवासीर के लिए जादुई औषधि बताया गया है, जिससे मस्से ठीक होते हैं और दोबारा आने की संभावना भी कम हो जाती है। आयुर्वेद में कचनार की जड़ को मस्से सुखाने का रामबाण इलाज माना गया है। कचनार की जड़ में पुराने से पुराने मस्सों को ठीक करने की क्षमता होती है।Kachnar Root for Piles
इसके लिए पुराने कचनार के पेड़ की जड़ को सुखाकर पाउडर बनाकर प्रयोग में लाना चाहिए। माना जाता है कि पेड़ जितना पुराना होता है, उसकी जड़ में उतने ही औषधीय गुण छिपे होते हैं। अगर कचनार की जड़ का पाउडर खाना नहीं चाहते हैं तो आप इसका लेप बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कचनार की सूखी जड़ का पाउडर और हल्दी और नारियल का तेल मिलाकर एक लेप तैयार कर लें और उसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं।Kachnar Root for Piles
इससे धीरे-धीरे मस्से सूखने लगेंगे और धीरे-धीरे गायब हो जाएंगे। कचनार की जड़ों का इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें। कचनार के फूल और छाल का प्रयोग अन्य रोगों को ठीक करने में भी किया जाता है। कचनार के फूल डायबिटीज को नियंत्रित करने में कारगर साबित होते हैं, बस उनके सेवन की विधि का पता होना चाहिए। Kachnar Root for Piles
कचनार के फूल का पाउडर आसानी से बाजार में मिल जाता है।Kachnar Root for Piles —आईएएनएस पीएस/डीकेपी


