http://हकृवि में कुलपति सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में हुआ कृषि शिक्षा, शोध एवं नवाचार पर मंथन
हिसार: 6 जनवरी
कुलपतियों के 49वें सम्मेलन में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में खेत से भविष्य तक: कृषि में नए क्षेत्रों का अन्वेषण, दूसरे सत्र में विकसित भारत 2047: कृषि संस्थानों की भूमिका और योगदान तथा तीसरे सत्र में सतत कृषि के भविष्य के लिए परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु बनाना विषयों पर विभिन्न कुलपतियों ने अपने विचार रखे।
प्रथम सत्र के चेयरमैन वीसीएसजी उत्तराखंड बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविन्दर कौशल, दूसरे सत्र के चेयरमैन उड़ीसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पर्वत कुमार राउल तथा तीसरे सत्र के चेयरमैन इंडियन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी एसोसिएशन (आईएयूए) के अध्यक्ष एवं जीबीपीयूएटी पंतनगर के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह रहे।
प्रथम सत्र में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला के कुलपति डॉ. शरद रामराव गडाख ने किसानों की आय दोगुनी करने का मॉडल प्रस्तुत किया। वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ, परभणी के कुलपति प्रो. इन्द्र मणि ने ‘एक लचीले कल के लिए जलवायु-स्मार्ट खेती’ पर अपने विचार रखे। सत्र में उत्पादन लागत को कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए छोटे किसानों के लिए खेत पर मशीनीकरण बढ़ाना, कृषि के मशीनीकरण में एक प्रभावी उपकरण के रूप में गांव स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना, ग्रामीण युवाओं और एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स को एग्री-एंटरप्रेन्योर के तौर पर खेती की ओर आकर्षित करना, प्रति यूनिट एरिया में सस्टेनेबिलिटी और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने के लिए दोहराए जा सकने वाले समन्वित कृषि प्रणाली मॉडल का विकास, कम से कम इंसानी दखल के साथ खेती को सपोर्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/डिजिटल प्लेटफॉर्म, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और प्रोसेसिंग का अनुपात बढ़ाने जैस बिंदुओं को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। आसाम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सत्र के को चेयरमैन डॉ. बिद्युत चंदन डेका ने भी अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को मजबूत करने पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और सतत विकास के लिए अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को मजबूत करना एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। प्रो. काम्बोज ने नई शिक्षा नीति-2020 को लचीली, बहु-विषयक, अनुसंधान-उन्मुख और समावेशी कृषि शिक्षा, किसान-केंद्रित, बाजार-लिंक्ड और डिजिटल रूप से सक्षम बताया। जीबीपीयूएटी पंतनगर के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2047 के लिए पशुओं में जीनोम एडिटिंग और क्लोनिंग विषय पर अपने विचार रखते हुए बताया कि ये टेक्नोलॉजी भविष्य की डेयरी मांग को पूरा करने में गेम चेंजर साबित होगी। एनडीआरआई करनाल के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने पोषण सुरक्षा के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया। तीसरे सत्र में सतत कृषि के भविष्य के लिए परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।


